Jharkhand Big News: झारखंड के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में लापरवाही की गंभीर तस्वीर सामने आई है. जनवरी माह में राज्यभर के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत 4468 डॉक्टर और कर्मचारी पूरे माह एक भी दिन ड्यूटी पर उपस्थित नहीं पाए गए. स्वास्थ्य विभाग के उपस्थिति पोर्टल (एसीवीएमएस) के विश्लेषण में इस चौंकाने वाले तथ्य का खुलासा हुआ है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग ने उपस्थिति को सीधे वेतन से जोड़ने का निर्णय लिया है.
पोर्टल विश्लेषण में सामने आए आंकड़े
एसीवीएमएस रिपोर्ट के अनुसार, राज्यभर में कुल 28,781 डॉक्टर और कर्मचारी उपस्थिति पोर्टल में पंजीकृत हैं, जिनमें से 4,468 की जनवरी माह में उपस्थिति शून्य पाई गई. मेडिकल कॉलेजों को छोड़ अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में 2,305 डॉक्टरों में से 405 (18%) और 24,246 कर्मियों में से 3,656 (15%) पूरे माह अनुपस्थित रहे.
मेडिकल कॉलेजों में भी स्थिति चिंताजनक
राज्य के सभी छह मेडिकल कॉलेजों में कुल 2,240 डॉक्टर और कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 405 की उपस्थिति जनवरी में शून्य दर्ज की गई. यह स्थिति तब है, जब अभी तक सभी डॉक्टर और कर्मियों ने उपस्थिति पोर्टल पर अपना निबंधन भी नहीं कराया है. विभाग का मानना है कि कई लोग जानबूझकर निबंधन से बच रहे हैं, ताकि उनकी निगरानी न हो सके.
उपस्थिति से जोड़ा जाएगा वेतन
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव के अनुसार अब जल्द ही सभी डॉक्टरों और कर्मियों का वेतन उपस्थिति पोर्टल से जोड़ा जाएगा. जितने दिन की उपस्थिति दर्ज होगी, उतने ही दिन का वेतन भुगतान किया जाएगा. साथ ही जिन कर्मियों ने अब तक पोर्टल पर निबंधन नहीं कराया है, उन्हें अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा.
हाजिरी के प्रतिशत ने खोली पोल
रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों को छोड़कर 24,246 कर्मियों में से केवल 31% (7,588) और 2,305 डॉक्टरों में से मात्र 24% (559) ऐसे थे, जिनकी जनवरी माह में उपस्थिति 75% से अधिक रही. वहीं, 50% से 74% उपस्थिति वाले कर्मियों की संख्या 8,762 और डॉक्टरों की संख्या 839 रही. इसके अलावा 17% (4,240) कर्मचारी और 22% (502) डॉक्टर ऐसे थे, जिनकी उपस्थिति 0 से 50% के बीच रही.
एसबीएमसीएच हजारीबाग का सबसे खराब प्रदर्शन
मेडिकल कॉलेजों के विश्लेषण में यह भी सामने आया कि शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसबीएमसीएच), हजारीबाग की स्थिति सबसे खराब रही, जहां उपस्थिति का स्तर अन्य संस्थानों की तुलना में सबसे कम दर्ज किया गया.
री-एडमिशन मामलों पर जसास की सख्ती
इधर, आयुष्मान भारत–मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 30 दिनों के भीतर मरीजों के पुनः भर्ती मामलों पर झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी (जसास) ने सख्ती दिखाई है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नई दिल्ली के मुख्य वित्तीय पदाधिकारी गयासुद्दीन अहमद ने योजना की समीक्षा करते हुए ऐसे अस्पतालों और पैकेजों की पहचान की है, जहां री-एडमिशन के मामले अधिक सामने आए हैं.
गुणवत्ता और निगरानी पर विशेष जोर
समीक्षा में उपचार की गुणवत्ता, फॉलो-अप और मानक उपचार प्रोटोकॉल के सख्त अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही केंद्र और राज्य के बीच समन्वय मजबूत करने, आईटी सिस्टम को सुदृढ़ करने और निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया है.
स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले डॉक्टर और कर्मियों की इतनी बड़ी संख्या में अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि व्यवस्था में गहरी खामियां हैं. “हाजिरी नहीं तो वेतन नहीं” का निर्णय प्रशासनिक सख्ती का संकेत है, लेकिन असली चुनौती इसे ईमानदारी से लागू करना है. यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हुई, तो इससे न केवल कार्यसंस्कृति सुधरेगी, बल्कि आम जनता को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं भी मिल सकेंगी.