Jharkhand Tender Scam: झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में सामने आए बहुचर्चित “कमिशन घोटाले” में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई तेज कर दी है. मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत ईडी ने विभाग के कार्यपालक, सहायक और कनीय अभियंताओं सहित करीब एक दर्जन अधिकारियों को समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है. जांच में यह खुलासा हुआ है कि टेंडर आवंटन के बदले एक तय कमीशन व्यवस्था लागू थी, जिसमें मंत्री से लेकर विभागीय इंजीनियर तक हिस्सा लेते थे.
कमीशन का “सेट फॉर्मूला”
ईडी की चार्जशीट के अनुसार, ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं में टेंडर पास कराने के लिए कुल राशि का लगभग 3.2 प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था. यह पूरी प्रक्रिया एक संगठित नेटवर्क के जरिए संचालित की जा रही थी.
कमीशन का बंटवारा:
- 1.5% हिस्सा सीधे तत्कालीन विभागीय मंत्री को जाता था.
- शेष राशि विभाग के इंजीनियरों और अन्य अधिकारियों में ऊपर से नीचे तक बांटी जाती थी.
32 करोड़ की बरामदगी से खुली परतें
इस घोटाले की गंभीरता तब सामने आई जब 6 मई 2024 को तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम के पीएस संजीव लाल के घरेलू नौकर जहांगीर के फ्लैट से ईडी ने 32.20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए. इसके अलावा, अन्य ठिकानों से भी बड़ी मात्रा में नकदी और दस्तावेज जब्त किए गए. ईडी के अनुसार, कमीशन की रकम को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने और ठिकाने लगाने की पूरी जिम्मेदारी संजीव लाल निभाता था.
22 आरोपियों पर चार्जशीट
ईडी अब तक इस मामले में तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम, उनके आप्त सचिव संजीव लाल, मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम और उनके परिजनों समेत 22 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. फिलहाल मंत्री और उनके करीबी न्यायिक हिरासत में हैं.
अब इंजीनियरों की भूमिका की जांच
जांच एजेंसी का कहना है कि इंजीनियर इस कमीशन चेन की सबसे अहम कड़ी थे, क्योंकि ठेकेदारों से सीधा संपर्क इन्हीं के जरिए होता था. समन जारी होते ही ग्रामीण विकास विभाग में हड़कंप मच गया है.
ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाएं सीधे गरीब और जरूरतमंद लोगों से जुड़ी होती हैं. ऐसे में कमीशनखोरी के इस तंत्र ने न केवल सरकारी धन को नुकसान पहुंचाया, बल्कि विकास की गति और भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाई है. यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित सत्ता-तंत्र के दुरुपयोग का संकेत देता है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह स्पष्ट हो रहा है कि निर्णय प्रक्रिया से लेकर जमीनी स्तर तक भ्रष्टाचार की जड़ें फैली हुई थीं. अब असली परीक्षा इस बात की है कि क्या जांच निष्पक्ष रूप से अंतिम कड़ी तक पहुंचेगी और क्या इससे व्यवस्था में भरोसा बहाल हो सकेगा.