Jharkhand News: झारखंड में सहायक आचार्य नियुक्ति को लेकर चल रही अनिश्चितता पर अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. परीक्षा परिणाम को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को राहत दिलाने की दिशा में कोर्ट ने जेएसएससी से सीधा जवाब मांगा है.
न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट में सुनवाई
विज्ञापन 13/2023 के तहत हुई सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के पूरे रिजल्ट को लेकर दायर याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट ने जेएसएससी सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि पूरा रिजल्ट आखिर कब तक जारी किया जाएगा.
टुकड़ों में रिजल्ट जारी करने पर सवाल
कोर्ट ने यह भी पूछा है कि आखिर क्यों थोड़ी-थोड़ी संख्या में परिणाम जारी किए जा रहे हैं. सभी सफल अभ्यर्थियों का रिजल्ट एक साथ क्यों नहीं निकाला गया, इस पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है. इस मामले में रामेश्वर महतो एवं अन्य की ओर से याचिका दायर की गई है. प्रार्थियों का कहना है कि सफल होने के बाद उनका डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी हो चुका है, फिर भी अब तक अंतिम परिणाम जारी नहीं किया गया. उन्होंने कक्षा 1 से 5 तक के सहायक आचार्य पद के लिए आवेदन किया था.
हजारों पद अब भी रिजल्ट के इंतजार में
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने बताया कि कक्षा 1 से 5 तक के 11000 रिक्त पदों में से अब तक केवल 4333 पदों का ही रिजल्ट जारी किया गया है. करीब 3500 से ज्यादा पदों का परिणाम अभी भी लंबित है.
कोई कमी नहीं फिर भी रोका जा रहा परिणाम
अधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि प्रार्थियों के डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में कोई त्रुटि नहीं पाई गई है और उन्हें सफल घोषित किया गया है. इसके बावजूद उनका और अन्य सफल अभ्यर्थियों का परिणाम रोका जा रहा है, जो असंवैधानिक है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी जिक्र
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि जेएसएससी कभी 50 तो कभी 100 पदों पर रिजल्ट जारी कर रही है. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने परिमल कुमार के मामले में सहायक आचार्य परीक्षा का पूर्ण रिजल्ट एक साथ जारी करने का निर्देश दिया है.
यह मामला केवल रिजल्ट में देरी का नहीं बल्कि पारदर्शिता और समानता से जुड़े अधिकारों का भी है. यदि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी अभ्यर्थियों को अनिश्चितता में रखा जाता है, तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. हाईकोर्ट का हस्तक्षेप अब इस पूरे मामले को निर्णायक दिशा दे सकता है.