Jamshedpur Big News: जिले के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने अब बेहद कड़े निर्देश लागू कर दिए हैं. स्कूल से जुड़े हर व्यक्ति की जांच और निगरानी को अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश न रहे.
हर कर्मचारी और चालक का होगा वेरिफिकेशन
जारी निर्देशों के अनुसार स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक शिक्षिकाएं, शिक्षकेतर कर्मचारी, स्कूल वैन और ऑटो चालक सभी के लिए पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी होगा. बच्चों के संपर्क में आने वाले किसी भी व्यक्ति को काम शुरू करने से पहले चरित्र प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा. यदि पुलिस जांच में किसी तरह की आपत्तिजनक जानकारी मिलती है तो ऐसे व्यक्ति को बच्चों से जुड़े किसी भी कार्य में नहीं लगाया जाएगा.
संयुक्त पत्र में सख्त अनुपालन के निर्देश
जिला शिक्षा अधीक्षक और जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से संयुक्त पत्र सभी निजी स्कूलों को भेज दिया गया है. स्कूल प्रबंधन को अपने यहां कार्यरत सभी कर्मियों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर विभाग को दिखाने के निर्देश दिए गए हैं. नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.
वाहनों और बसों के लिए अलग नियम
स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके सभी वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम एक्टिव रहे. वाहन चालकों की काउंसेलिंग की जाएगी और उनकी पूरी जानकारी पुलिस को भी उपलब्ध कराई जाएगी. चालक के साथ स्कूल गार्ड का भी पुलिस वेरिफिकेशन कराना होगा. स्कूल परिसर और बसों में सीसीटीवी कैमरे लगवाना अनिवार्य किया गया है.
स्कूल बसों में महिला शिक्षिका जरूरी
नए आदेशों के तहत स्कूल बसों में महिला शिक्षिका की मौजूदगी अनिवार्य होगी. बसों के रूट की जानकारी स्कूल और अभिभावकों दोनों को दी जाएगी. सभी बसों में सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम होना जरूरी होगा ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके.
हालिया घटना के बाद लिया गया फैसला
टेल्को क्षेत्र के एक निजी स्कूल में छात्रा के साथ वैन चालक द्वारा की गई छेड़छाड़ की घटना के बाद विभाग ने यह सख्त कदम उठाया है. अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा.
यह निर्णय दिखाता है कि शिक्षा विभाग अब केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि बच्चों के सुरक्षित माहौल पर भी बराबर ध्यान दे रहा है. पुलिस वेरिफिकेशन, सीसीटीवी और जीपीएस जैसी व्यवस्थाएं स्कूलों की जिम्मेदारी तय करती हैं और अभिभावकों का भरोसा मजबूत करती हैं. सख्ती से लागू होने पर यह व्यवस्था भविष्य में कई घटनाओं को रोकने में मददगार साबित हो सकती है.