Jamshedpur Big News: औद्योगिक शहर जमशेदपुर को लेकर एक गंभीर खुफिया चेतावनी सामने आने के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. इंटरपोल की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के बाद जिले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हलचल तेज हो गई है और पूरे तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है.
एसएसपी से लेकर खुफिया एजेंसियां एक्टिव
रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला पुलिस, आईबी और इंटेलिजेंस विभाग को लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं. एसएसपी समेत सभी वरीय अधिकारियों को चौकस रहने को कहा गया है. राज्य सरकार स्तर पर भी उच्चस्तरीय बैठक की तैयारी की जा रही है, जिसमें आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा.
स्लीपर सेल नेटवर्क की बात रिपोर्ट में
खुफिया इनपुट में दावा किया गया है कि जमशेदपुर में एक दर्जन से अधिक स्लीपर सेल सक्रिय हैं. बताया गया है कि इनका सीधा या परोक्ष संबंध पाकिस्तान से है और कुछ लोग वहां आतंकी प्रशिक्षण भी ले चुके हैं. रिपोर्ट के अनुसार आजादनगर के जाकिरनगर रोड नंबर-14 निवासी सैयद मोहम्मद अर्शियान इस नेटवर्क को लीड कर रहा है. आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के बाद से वह पिछले सात-आठ वर्षों से फरार है. उसकी तलाश में एनआईए और एटीएस की टीमें कई बार शहर आ चुकी हैं.
पुराना केस जिसने बढ़ाई चिंता
दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने 18 जनवरी 2016 को हरियाणा के मेवात से अलकायदा से जुड़े आतंकी अब्दुल शमी को गिरफ्तार किया था. वह ओडिशा के कटक से 15 दिसंबर 2015 को पकड़े गए अब्दुल रहमान उर्फ कटकी के संपर्क में था. पूछताछ में सामने आया था कि कटकी को ओडिशा और झारखंड में नेटवर्क तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी. इसी सिलसिले में अब्दुल शमी जनवरी 2014 में दुबई के रास्ते पाकिस्तान गया था, जहां मंसेरा में उसने हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया. जनवरी 2015 में भारत लौटने के बाद वह कटकी के संपर्क में रहा. 13 जनवरी 2016 को वह जमात में जाने की बात कहकर घर से निकला था और पांच दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया.
क्यों संवेदनशील माना जाता है जमशेदपुर
टाटा स्टील और टाटा मोटर्स जैसी बड़ी औद्योगिक इकाइयों की मौजूदगी के कारण जमशेदपुर राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र है. ऐसे प्रतिष्ठान आतंकी संगठनों के लिए हाई इम्पैक्ट टारगेट माने जाते हैं. टाटानगर रेलवे जंक्शन के साथ राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों का मजबूत नेटवर्क शहर को लॉजिस्टिक रूप से भी अहम बनाता है. ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार से सीधी कनेक्टिविटी आसान आवाजाही को संभव बनाती है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों को छिपाने में मदद मिल सकती है. बीते वर्षों में अलकायदा और सिमी से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी और छापेमारी की घटनाएं भी यहां सामने आ चुकी हैं.
इंटरपोल की रिपोर्ट ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि औद्योगिक और लॉजिस्टिक रूप से मजबूत शहर आतंकी संगठनों के लिए हमेशा संवेदनशील रहते हैं. जमशेदपुर में पहले से सामने आए मामलों और अब मिले इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह चुनौती है कि वे किसी भी संभावित खतरे को समय रहते पहचान कर निष्क्रिय करें. सतर्कता और बेहतर समन्वय ही शहर की सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी साबित हो सकते हैं.