Jharkhand: पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने आज पश्चिम सिंहभूम जिले के टोंटो प्रखंड अंतर्गत सेरेंगसिया घाटी पहुंचकर कोल विद्रोह के अमर शहीद वीर पोटो हो सहित अन्य शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उन्होंने राज्य की गठबंधन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसे आदिवासी विरोधी करार दिया।
शहीदों को नमन करने के बाद चम्पाई सोरेन ने कहा कि जिन जल, जंगल, जमीन और परंपराओं की रक्षा के लिए आदिवासी पूर्वजों ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष किया, वही अधिकार आज भी गंभीर संकट में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आदिवासियों के संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों को लगातार कमजोर कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों से चली आ रही परंपरा को तोड़ते हुए सेरेंगसिया के ग्रामीणों द्वारा हर वर्ष आयोजित किए जाने वाले सांस्कृतिक और खेलकूद कार्यक्रमों को जबरन रद्द कराया गया। उनका आरोप था कि इसका एकमात्र कारण यह था कि ग्रामीणों ने उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था।
उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि भोगनाडीह से लेकर सेरेंगसिया तक शहीदों के परिजनों और पारंपरिक ग्राम प्रधानों के फैसलों को नजरअंदाज कर पुलिस बल के जरिए सरकारी आदेश थोपने की कोशिश की जा रही है, जिसे आदिवासी समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
सारंडा क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए चम्पाई सोरेन ने आरोप लगाया कि सरकार खनन कंपनियों को बचाने के लिए तत्परता से सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई, लेकिन हजारों वर्षों से सारंडा में बसे लाखों आदिवासियों के अधिकारों पर उसने एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि वहां रहने वाले आदिवासी परिवारों का क्या होगा और उन्हें उजाड़ने की कोशिश क्यों की जा रही है।
पेसा अधिनियम को लेकर उन्होंने सरकार पर आदिवासियों को गुमराह करने का आरोप लगाया। चम्पाई सोरेन ने कहा कि ग्राम सभा अध्यक्ष की नियुक्ति में “अन्य” का प्रावधान रखकर पिछले दरवाजे से मनमानी की गुंजाइश छोड़ी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शेड्यूल एरिया में राज्यपाल संरक्षक की भूमिका में होते हैं, तो उपायुक्त को मालिक कैसे बनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस कैबिनेट बैठक में पेसा अधिनियम को मंजूरी दी गई, उसी बैठक में बिना ग्राम सभा की अनुमति के नोवामुंडी में 850 एकड़ से अधिक आदिवासी भूमि हिंडाल्को को सौंप दी गई। उन्होंने कहा कि जब कोल ब्लॉक पलामू प्रमंडल में आवंटित किया गया है, तो वन क्षति की भरपाई कोल्हान जैसे शेड्यूल एरिया में क्यों की जा रही है, जहां आदिवासी हजारों वर्षों से खेती करते आ रहे हैं और जहां देशाउली व सरना स्थल मौजूद हैं।
चम्पाई सोरेन ने आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार बांग्लादेशी घुसपैठ और धर्मांतरण की दोहरी मार झेल रहे आदिवासी समाज को खत्म करने की साजिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो आदिवासी सभ्यता को मिटाने का काम वह सरकार कर देगी, जो अंग्रेजी हुकूमत भी नहीं कर पाई थी।
इससे पूर्व चाईबासा पहुंचने पर तांबो चौक समेत विभिन्न स्थानों पर नो एंट्री आंदोलनकारियों और अन्य संगठनों से जुड़े हजारों आदिवासियों ने पूर्व मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने गीतीलता शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की और समर्थकों के साथ सेरेंगसिया पहुंचे। कार्यक्रम में सेरेंगसिया शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष महेंद्र लागुरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक उपस्थित रहे।