Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-02-02

Editorial: 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर घोषित, झारखंड को नहीं मिली जगह

Editorial (Anshuman Kr. Sah): केंद्र सरकार ने देश में रेल कनेक्टिविटी को तेज और आधुनिक बनाने की दिशा में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है. इन कॉरिडोरों से महानगरों और बड़े आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा समय को काफी कम करने का दावा किया गया है.


हालांकि, इस घोषणा के बाद झारखंड को किसी भी हाई-स्पीड रेल रूट में शामिल नहीं किए जाने पर राज्य में नाराजगी और असंतोष देखने को मिल रहा है.


ये हैं घोषित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
केंद्र सरकार द्वारा जिन 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है, वे इस प्रकार हैं:
• मुंबई – पुणे
• पुणे – हैदराबाद
• हैदराबाद – बेंगलुरु
• हैदराबाद – चेन्नई
• चेन्नई – बेंगलुरु
• दिल्ली – वाराणसी
• वाराणसी – सिलीगुड़ी
इन सभी रूटों पर नजर डालें तो किसी भी मार्ग से झारखंड नहीं गुजरता, जबकि वाराणसी–सिलीगुड़ी जैसे पूर्वी भारत के कॉरिडोर में भी झारखंड को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है.

खनिज संपदा के बावजूद रेल सुविधाओं से वंचित
झारखंड देश के लिए कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिज संसाधनों का बड़ा केंद्र माना जाता है. राज्य की खदानों से प्रतिदिन सैकड़ों मालगाड़ियां देश के विभिन्न हिस्सों में भेजी जाती हैं.
इसके बावजूद, जब बात यात्री रेल सुविधाओं और हाई-स्पीड ट्रेनों की आती है, तो झारखंड आज भी पिछड़ा हुआ नजर आता है.

कम दूरी, लेकिन ज्यादा यात्रा समय
झारखंड के भीतर और आसपास के प्रमुख रेल मार्गों पर यात्रा समय लोगों की परेशानी बढ़ाता है:
• रांची – टाटानगर (170 किमी): 4 से 7 घंटे
• रांची – धनबाद (162 किमी): 4.5 से 5.5 घंटे
• धनबाद – टाटानगर (195 किमी): 5 से 7 घंटे
• दुमका – रांची (393 किमी): 9 से 10 घंटे
• गढ़वा रोड – रांची (368 किमी): 4.5 से 7 घंटे
• साहिबगंज – रांची (493 किमी): करीब 12 घंटे
• गढ़वा रोड – धनबाद (331 किमी): करीब 8 घंटे
लोगों का कहना है कि कम दूरी होने के बावजूद झारखंड में रेल यात्रा में अत्यधिक समय लगता है, जबकि अन्य राज्यों में हाई-स्पीड और सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों पर तेजी से काम किया जा रहा है.

विकास की प्राथमिकताओं पर सवाल
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से झारखंड को बाहर रखने को लेकर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या एक ही देश में विकास की प्राथमिकताएं अलग-अलग तय की जा रही हैं?

राज्य के लोग और सामाजिक संगठन यह मांग कर रहे हैं कि झारखंड को भी आधुनिक रेल परियोजनाओं से जोड़ा जाए, ताकि यहां के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी, समय की बचत और आर्थिक विकास का लाभ मिल सके.

जनता की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि झारखंड जैसे खनिज-समृद्ध राज्य को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो इससे न सिर्फ राज्य के विकास पर असर पड़ेगा, बल्कि क्षेत्रीय असंतुलन भी और गहरा होगा.
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार भविष्य में झारखंड को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं.

WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !