ऑनलाइन आवेदन किया था
गोपीनाथपुर निवासी देवव्रत कुमार ने अपने पुत्र नितिन कुमार के जन्म पंजीकरण के लिए भारत सरकार के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन संख्या BA202520020000000034 के साथ उन्हें उम्मीद थी कि डिजिटल प्रक्रिया के तहत समय पर प्रमाण पत्र मिल जाएगा, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिला।
इसके बाद आवेदक जब जन्म–मृत्यु पंजीकरण कार्यालय पहुँचे तो आरोप है कि वहाँ मौजूद कर्मियों ने फाइल को खोजने यानी सर्चिंग के नाम पर अवैध धन की मांग की। बताया जा रहा है कि जिस सेवा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए, उसके लिए खुलेआम पैसे मांगे जा रहे हैं।
इस संबंध में चंद्रशेखर कुमार माझी ने बताया
इस संबंध में चंद्रशेखर कुमार माझी ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद महीनों तक कार्यालय के चक्कर काटने पड़े। हर बार सर्चिंग के नाम पर पैसे की मांग की जाती है, जो स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार को दर्शाता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आवेदक ने उपविकास आयुक्त (DDC), बोकारो से दूरभाष पर संपर्क किया। DDC ने मामले को संज्ञान में लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, सवाल अब भी कायम है कि क्या बिना रिश्वत और बिना पैरवी के एक आम नागरिक को उसका हक मिल पाएगा।
जन्म प्रमाण पत्र केवल एक दस्तावेज नहीं
गौरतलब है कि जन्म प्रमाण पत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि बच्चे के आधार कार्ड, स्कूल नामांकन और भविष्य से जुड़ी कई आवश्यक प्रक्रियाओं का आधार होता है। अब देखना होगा कि जांच के बाद सर्चिंग के नाम पर वसूली करने वालों पर क्या कार्रवाई होती है।