Jamshedpur Breaking: जमशेदपुर के अधिसूचित क्षेत्र समिति इलाके में अवैध निर्माण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ कर दिया है कि पहले दिए गए आदेश में कोई बदलाव नहीं होगा और अवैध निर्माण हटाए जाएंगे.
संशोधन की मांग पर हाईकोर्ट का इनकार
राकेश कुमार झा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सभी 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण तोड़े जाएंगे. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में पहले ही आदेश पारित किया जा चुका है और उसमें किसी तरह का संशोधन नहीं किया जाएगा.
14 जनवरी के आदेश को बरकरार रखा
प्रतिवादियों ने 14 जनवरी 2026 को दिए गए आदेश में संशोधन की मांग की थी. उन्होंने भवन तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाने की अपील की थी. कोर्ट ने यह कहते हुए मांग खारिज कर दी कि अवैध निर्माण किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है.
खंडपीठ ने अवैध निर्माण पर जताई नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए निर्माण पर कोई राहत नहीं दी जा सकती. अदालत ने अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने का संदेश दिया.
प्रतिवादियों ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के 14 जनवरी के आदेश पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी. हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया. जेएनएसी की ओर से अधिवक्ता कृष्ण कुमार ने अदालत में पक्ष रखा.
एक माह में तोड़फोड़ का निर्देश
हाईकोर्ट ने 14 जनवरी की सुनवाई के दौरान जेएनएसी को निर्देश दिया था कि प्रतिवादियों द्वारा किए गए अवैध निर्माण और नक्शा विचलन को हटाया जाए. अदालत ने एक माह के भीतर कार्रवाई पूरी करने का आदेश दिया था. अदालत ने जेएनएसी को अगली सुनवाई से पहले की गई कार्रवाई से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश भी दिया है. इस मामले में अब अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी.
हाईकोर्ट का यह आदेश शहरी क्षेत्रों में बढ़ते अवैध निर्माण के खिलाफ एक मजबूत संदेश माना जा रहा है. अदालत की सख्ती से यह स्पष्ट हो गया है कि नियमों की अनदेखी कर बनाए गए भवनों को किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं मिलेगा और प्रशासन को तय समयसीमा में कार्रवाई करनी ही होगी.