Jamshedpur: उच्च शिक्षा में नई बदलाव की दिशा में उठाए गए कदम ने झारखंड में करणी सेना की नाराजगी बढ़ा दी है। क्षत्रिय संगठन के राज्य युवा अध्यक्ष मोहित सिंह ने केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी UGC Regulations, 2026 पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह अधिसूचना संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है और इसके माध्यम से समानता के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
90 दिनों के भीतर स्थापित करनी होगी कमेटी
मोहित सिंह ने बताया कि इस अधिसूचना के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है। इन कमेटियों को छात्रों से जुड़ी शिकायतों की जांच करने का अधिकार मिलेगा और उन्हें संस्थानों में न्याय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। नियम के अनुसार, संस्थानों को यह कमेटी 90 दिनों के भीतर स्थापित करनी होगी।
भारत का संविधान सभी को सामान अधिकार देता
हालांकि, करणी सेना का मानना है कि यह व्यवस्था विशेष रूप से SC, ST और OBC वर्ग के छात्रों के हितों पर केंद्रित है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों और समान अवसरों की अनदेखी करती है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह ने कहा, “भारत का संविधान अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है। किसी भी नीति का उद्देश्य केवल एक वर्ग के लिए विशेष लाभ नहीं होना चाहिए। यह अधिसूचना समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर करती है और संविधान की मूल संरचना के विपरीत है।”
अधिसूचना को वापस लेने की मांग
करणी सेना ने केंद्र सरकार और UGC से तत्काल प्रभाव से इस अधिसूचना को वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि नीति बनाने में सभी वर्गों के हितों का संतुलित ध्यान रखना चाहिए और व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही कोई नया नियम लागू होना चाहिए।
उच्च शिक्षा में बदलाव न्याय और समान सुनिश्चित करना हो
करणी सेना के नेताओं का यह भी कहना है कि उच्च शिक्षा में किसी भी बदलाव का उद्देश्य केवल सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि किसी एक वर्ग के पक्ष में असंतुलन पैदा करना।