Jharkhand Politics: झारखंड की सियासत अब राज्य की सीमाओं से बाहर निकलने के संकेत दे रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हालिया बयान से यह चर्चा तेज हो गई है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा आने वाले समय में असम और पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकता है. दुमका से रांची रवाना होने से पहले सीएम की बातचीत ने इस संभावना को नई दिशा दे दी है.
दुमका एयरपोर्ट से मिला बड़ा राजनीतिक संकेत
मंगलवार को दुमका हवाईअड्डे पर मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि असम और पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में झामुमो अपने उम्मीदवार उतार सकता है. उन्होंने कहा कि यह पार्टी का स्वतंत्र निर्णय होगा और अंतिम फैसला संगठन के स्तर पर लिया जाएगा. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहां आदिवासी आबादी अधिक है वहां पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने पर विचार कर सकती है.
गुरुजी की विरासत और आदिवासी जुड़ाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम के कई इलाकों में पहले से ही गुरुजी का जाना आना रहा है और वहां के लोग झामुमो से परिचित हैं. उन्होंने बताया कि असम में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं और चाय उद्योग उनकी मेहनत पर आधारित है. करीब सौ से डेढ़ सौ वर्षों से अलग अलग राज्यों में आदिवासियों को काम के लिए बसाया गया लेकिन आज भी वे अपनी पहचान और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं. ऐसे इलाकों में झामुमो पर लोगों का भरोसा है और अगर पार्टी उनकी आवाज बन सकती है तो इसमें कोई गलत नहीं है.
दुमका में जनता से संवाद
सोमवार को मुख्यमंत्री दुमका के गांधी मैदान में झामुमो द्वारा आयोजित 47वें झारखंड दिवस समारोह में शामिल हुए थे. रात्रि विश्राम उन्होंने दुमका राजभवन में किया. मंगलवार को रांची लौटने से पहले उन्होंने लोकभवन में लोगों से मुलाकात की. जनता की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए.
हेमंत सोरेन के बयान ने यह साफ कर दिया है कि झामुमो अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहना चाहता. आदिवासी बहुल राज्यों में संगठन की पहचान और पुराने संपर्क को आधार बनाकर पार्टी नई राजनीतिक जमीन तलाश सकती है. हालांकि यह फैसला पार्टी के स्तर पर होगा लेकिन मुख्यमंत्री के संकेत से इतना स्पष्ट है कि आने वाले समय में झामुमो की भूमिका क्षेत्रीय से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर की ओर बढ़ सकती है.