150 साल वंदे मातरम की गूँज
इस वर्ष का समारोह विशेष रूप से ऐतिहासिक है क्योंकि गणतंत्र दिवस 2026 की मुख्य थीम “वंदे मातरम के 150 वर्ष” रखी गई है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह राष्ट्रीय गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्राण रहा है। परेड के दौरान प्रदर्शित झांकियों, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के केंद्र में वंदे मातरम को रखा गया है। यह थीम न केवल गीत के 150 वर्षों का उत्सव मनाती है, बल्कि भारत की आजादी की लड़ाई और हमारी सांस्कृतिक पहचान के गहरे जुड़ाव को भी प्रदर्शित करती है।
यूरोपीय संघ के साथ बढ़ती रणनीतिक निकटता
भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण इस साल के मुख्य अतिथियों की सूची में दिखा। इस बार यूरोपीय संघ के दो सबसे प्रभावशाली नेता—यूरोपीय परिषद के प्रमुख एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन—समारोह में शामिल हुए। इन शीर्ष नेताओं की उपस्थिति भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत होते व्यापारिक, रक्षा और रणनीतिक संबंधों का प्रतीक है।
शहीदों को नमन और सैन्य सम्मान
आधिकारिक समारोह की शुरुआत सुबह 9:30 बजे हुई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का दौरा किया। यहाँ उन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इंटर-सर्विसेज गार्ड द्वारा औपचारिक सलामी दी गई और राष्ट्र ने दो मिनट का मौन रखकर अमर बलिदानियों को याद किया।
तिरंगा और भव्य परेड
समारोह का मुख्य आकर्षण सुबह 10:30 बजे शुरू हुआ, जब राष्ट्रपति का कर्तव्य पथ पर आगमन हुआ। राष्ट्रगान की गौरवमयी धुन के बीच राष्ट्रपति ने तिरंगा फहराया। इसके बाद शुरू हुई पारंपरिक परेड, जिसमें भारतीय सेना की विभिन्न रेजिमेंटों, नौसेना और वायु सेना के पराक्रम का प्रदर्शन किया गया। आधुनिक हथियारों की प्रदर्शनी और विभिन्न राज्यों की कलात्मक झांकियों ने भारत की विविधता में एकता की तस्वीर पेश की।
यह गणतंत्र दिवस न केवल हमारे संविधान के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर है, बल्कि आधुनिक और विकसित भारत की ओर बढ़ते कदमों का प्रतिबिंब भी है।