Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम थाना क्षेत्र अंतर्गत गेरुआ गांव स्थित लेक व्य रिसॉर्ट में बीते 18 जनवरी को होटल मैनेजर संतोष गिरी के साथ मारपीट कर अपहरण करने की गंभीर घटना सामने आई है। आरोप है कि लेक व्यू होटल एंड रिसोर्ट के मालिक संतोष गिरी के चचेरे भाई संजीत गिरी, आशुतोष गिरी समेत कुल पांच लोगों ने पुराने लेनदेन विवाद को लेकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट कर उनका अपहरण कर लिया। सीसीटीवी वीडियो में देखा जा रहा है कि करीब 4 से 5 युवक संतोष गिरी को घसीटते और मरते हुए ले जा रहे है जिसके बाद एक अन्य वीडियो में देखा जा सकता है कि एक काले रंग की कार में जबरन युवक उन्हें बैठा भी रहे है।
पीड़ित संतोष गिरी की लिखित शिकायत पर बोड़ाम थाने में सोमवार को संजीत गिरी, आशुतोष गिरी और तीन अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने मंगलवार को बिहार के पटना जिला निवासी संजीत गिरी व आशुतोष गिरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि अन्य तीन आरोपी अब भी फरार हैं। सवाल यह उठता है कि जब मामला करीब एक साल से विवादित था और नवंबर में भी झगड़ा हो चुका था, तो पुलिस ने पहले ही सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की?
पुलिस पूछताछ में संजीत गिरी ने दावा किया कि संतोष उसका चचेरा भाई है और दोनों की कोलकाता में होटल पार्टनरशिप थी, जिसमें उसने करीब 25 लाख रुपये लगाए थे। होटल बंद होने के बाद संतोष कथित रूप से जमशेदपुर भाग आया और पिछले पांच महीने से नया होटल चला रहा है। संजीत का आरोप है कि पैसा मांगने पर संतोष टालमटोल करता रहा और भागने की फिराक में था।
वहीं संतोष गिरी का कहना है कि 18 जनवरी को संजीत और आशुतोष रिसॉर्ट में आए और उसके साथ मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। उसने यह भी आरोप लगाया कि जुलाई महीने में कोलकाता जाकर दोनों ने उसकी मां के साथ भी मारपीट की थी, जिसकी प्राथमिकी वहां के स्थानीय थाने में दर्ज है। इसके बावजूद, लगातार मिल रही शिकायतों के बाद भी पुलिस की सुस्ती सवालों के घेरे में है।
सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद उल्टा आरोपी पक्ष संतोष को लेकर शिकायत करने बोड़ाम थाना पहुंचा। पुलिस ने जब संतोष के शरीर पर चोट के निशान देखे, तब यह सवाल उठाया कि मारपीट के तुरंत बाद शिकायत क्यों नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते गंभीरता दिखाती, तो यह मामला इतना नहीं बढ़ता।
गौरतलब है कि हाल ही में बिष्टुपुर से एक बड़े उद्योग समूह से जुड़े परिवार के युवक के लापता होने का मामला भी सुर्खियों में है। ऐसे में संतोष गिरी का सुरक्षित बरामद होना भले राहत की बात हो, लेकिन इस तरह की घटनाएं जिले की कानून व्यवस्था और पुलिस की तत्परता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। आए दिन इस प्रकार के गंभीर मामलों में पुलिस की सुस्त कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है।
इस पूरे प्रकरण ने बोड़ाम थाना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना प्रभारी मनोरंजन कुमार ने जांच जारी होने की बात कही है, लेकिन पीड़ित पक्ष और स्थानीय ग्रामीणों में पुलिस की निष्क्रियता को लेकर गहरा रोष है। अब देखना यह होगा कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी कब होती है और क्या पुलिस अपनी लापरवाही के आरोपों से खुद को पाक साफ साबित कर पाती है या नहीं।