Jharkhand: राज्य में सामने आए बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को एक अहम सफलता मिली है। जांच एजेंसी ने फर्जी बैंक गारंटी के जरिए किए गए इस घोटाले में पैसों के लेन-देन से जुड़े बड़े खुलासे किए हैं, जिससे कई प्रभावशाली नामों पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है।
एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में विनय सिंह ने करीब 70 लाख रुपये की अवैध वसूली की थी। जांच में सामने आया है कि यह रकम तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे के निर्देश पर ली गई थी। इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा आरपी महेश शेगड़े के बयान के आधार पर हुआ है, जिसे एसीबी ने विधिवत रूप से दर्ज किया है। अधिकारियों ने इस बयान की पुष्टि भी की है।
राजीव कुमार झा के बयान ने दिया नया मोड़
जांच के दायरे को आगे बढ़ाते हुए एसीबी अब नेक्सजेन सॉल्यूशन टेक्नोलॉजी से जुड़े बैंक खातों की भी बारीकी से जांच कर रही है। इसी क्रम में कंपनी के अकाउंट से जुड़े राजीव कुमार झा का बयान दर्ज किया गया। उनके बयान ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है।
राजीव कुमार झा ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि विनय चौबे की पत्नी स्वपना संचिता न तो कभी किसी आधिकारिक बैठक में शामिल हुईं और न ही उन्होंने कंपनी के कार्यालय का दौरा किया। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि एसीबी की पिछली जांच में यह सामने आया था कि स्वपना संचिता को नेक्सजेन सॉल्यूशन टेक्नोलॉजी में कंसल्टेंट के तौर पर दिखाया गया था।
भुगतान की वास्तविक मंशा पर गंभीर सवाल खड़े
रिकॉर्ड के मुताबिक, स्वपना संचिता को वर्ष 2019 से 2023 के बीच हर महीने 1.50 लाख रुपये का भुगतान किया गया। हालांकि, जांच के दौरान एसीबी को न तो कोई नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराया गया और न ही उनकी नियुक्ति से संबंधित किसी विज्ञापन या चयन प्रक्रिया के दस्तावेज पेश किए गए। इससे इस भुगतान की वास्तविक मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एसीबी अधिकारियों कार्रवाई जारी
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि अब जांच का फोकस मनी ट्रेल पर है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह भुगतान किन खातों से किया गया, किन माध्यमों से रकम ट्रांसफर हुई और क्या इस धनराशि का इस्तेमाल किसी अन्य अवैध उद्देश्य के लिए किया गया।
सूत्रों की मानें तो शराब घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, और भी नाम सामने आने की संभावना है। एसीबी इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि फर्जी बैंक गारंटी के जरिए किस तरह सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया और इस संगठित भ्रष्टाचार में कौन-कौन लोग शामिल थे।