Jharkhand: झारखंड में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सत्ता हथियाने वालों के खिलाफ राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अख्तियार किया है। ताजा मामला देवघर जिले के गोपीनाथडीह पंचायत का है, जहाँ के मुखिया बिजेंद्र कुमार पासवान का निर्वाचन रद्द कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने बिहार और झारखंड के फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र का उपयोग कर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
जानिए क्या है पूरा मामला
बिजेंद्र कुमार पासवान पर आरोप था कि उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और चुनाव में आरक्षित सीट का फायदा उठाने के लिए अवैध तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनवाया था। इस मामले की शिकायत पूर्व मुखिया छोटू कुमार दास ने राज्य निर्वाचन आयोग और माननीय उच्च न्यायालय में की थी।
शिकायत के बाद, राज्य की जाति छानबीन समिति ने मामले की गहनता से जांच की। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि पासवान द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज नियमों के विरुद्ध और फर्जी थे। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने तत्काल प्रभाव से उनके निर्वाचन को अवैध घोषित करते हुए पद से हटाने का आदेश जारी किया।
प्रशासनिक बदलाव और आगामी कदम
मुखिया पद रिक्त होने के बाद पंचायत में प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग के नियमानुसार, वर्तमान उप-मुखिया कौशल्या देवी को मुखिया का प्रभार सौंपा जा सकता है। इससे पंचायत के विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने की कोशिश की जाएगी।
क्षेत्र में चर्चा का विषय
इस कार्रवाई ने जिले के अन्य जनप्रतिनिधियों के बीच भी हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय ग्रामीणों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि फर्जीवाड़े के कारण पंचायत की साख पर सवाल उठे हैं। प्रशासन अब यह भी जांच कर सकता है कि इस फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर अब तक कितनी सरकारी राशि या योजनाओं का लाभ लिया गया है।