विलुप्त हो रहे करोड़ों साल पुराने अवशेष
सरयू राय के अनुसार, झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र, विशेषकर राजमहल की पहाड़ियों में बड़ी संख्या में काष्ठ जीवाश्म मौजूद हैं। ये अवशेष लगभग 12 से 14 करोड़ वर्ष पुराने हैं, जो उस समय हुए बड़े जलवायु परिवर्तनों के कारण वृक्षों के खनिजों के संपर्क में आने और पत्थर में बदल जाने से बने थे।
विधेयक की आवश्यकता क्यों
विधायक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में साहेबगंज में एक जीवाश्म पार्क तो है, लेकिन साहेबगंज के अन्य क्षेत्रों और पाकुड़ जिले में बिखरे हुए जीवाश्मों के संरक्षण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।मानवीय गतिविधियाँ, निर्माण और खनन जैसी गतिविधियों के कारण ये अनमोल विरासत नष्ट हो रही है। कानूनी ढांचे का अभाव वर्तमान में इन स्थलों के संरक्षण के लिए कोई विशिष्ट राज्य कानून नहीं है।
संरक्षण और विकास का लक्ष्य
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य इन जीवाश्म स्थलों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना और उन्हें भू-विरासत के रूप में विकसित करना है। सरयू राय ने अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि इस विधेयक को अधिनियमित किया जाए ताकि सरकार इसके आधार पर नियमावली तैयार कर सके। इससे न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इन क्षेत्रों को पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा सकेगा।