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  • 2026-01-20

Jharkhand News: झारखंड कोचिंग सेंटर नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025 को राज्यपाल की मंजूरी, अब तय नियमों में चलेगा सिस्टम

Jharkhand News: झारखंड में कोचिंग सेंटरों की मनमानी पर अब कानूनी लगाम लगने जा रही है. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड कोचिंग सेंटर नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025 को मंजूरी दे दी है. इस कानून का उद्देश्य राज्य में संचालित कोचिंग संस्थानों को एक तय ढांचे में लाना और विद्यार्थियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. विधेयक के लागू होने के बाद कोचिंग सेंटरों का संचालन स्पष्ट नियमों और शर्तों के तहत होगा.

पंजीकरण और न्यूनतम मानक होंगे अनिवार्य
नए कानून के तहत राज्य के सभी कोचिंग सेंटरों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है. इसके साथ ही विद्यार्थियों की सुरक्षा, उनके हितों की रक्षा और संस्थानों के लिए न्यूनतम मानकों का निर्धारण किया गया है. बिना पंजीकरण के कोचिंग सेंटर चलाने पर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है.

जिला और राज्य स्तर पर बनेगी निगरानी व्यवस्था
विधेयक के अनुसार जिला स्तर पर कोचिंग सेंटर विनियामक समिति का गठन किया जाएगा, जिसके अध्यक्ष उपायुक्त होंगे. वहीं राज्य स्तर पर झारखंड राज्य कोचिंग सेंटर विनियमन प्राधिकरण का गठन होगा, जिसके अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायिक पदाधिकारी होंगे. यह संस्थाएं कोचिंग सेंटरों की निगरानी और शिकायतों के निपटारे का काम करेंगी.

छह माह में कराना होगा रजिस्ट्रेशन
अधिनियम लागू होने के बाद कोचिंग संचालकों को छह माह के भीतर या सरकार द्वारा तय समय सीमा के अनुसार वेब पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना होगा. किसी भी कोचिंग संस्थान के जिले के भीतर या बाहर स्थित प्रत्येक कैंपस का अलग अलग पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा.

फ्रेंचाइजी मॉडल पर भी नियंत्रण
फ्रेंचाइजी के माध्यम से संचालित कोचिंग संस्थानों पर भी कानून लागू होगा. फ्रेंचाइजर और फ्रेंचाइजी दोनों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा और नियमों के पालन की संयुक्त जिम्मेदारी तय की गई है.

मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर
हर एक हजार विद्यार्थियों पर कम से कम एक मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता रखना अनिवार्य होगा. यह परामर्शदाता वर्ष में 200 दिनों तक विद्यार्थियों को मुफ्त परामर्श उपलब्ध कराएगा. मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों का भी वेब पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी होगा.

विद्यार्थियों और कर्मियों के हित में कई प्रावधान
सभी कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों के जेंडर के अनुसार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी. कोचिंग सेंटर का संचालन सुबह छह बजे से रात नौ बजे तक ही किया जा सकेगा. हर संस्थान को अपने साइन बोर्ड पर पंजीकृत कोचिंग सेंटर शब्द का उपयोग करना होगा. फीस वसूली की पूरी जानकारी नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर देना अनिवार्य होगा.

नामांकन और प्रचार पर सख्ती
सोलह वर्ष से कम उम्र के विद्यार्थियों को माता-पिता की लिखित सहमति के बिना कोचिंग में नामांकन नहीं दिया जाएगा. नामांकन के दौरान अच्छे रैंक या उच्च अंक दिलाने के झूठे दावे करने पर कार्रवाई का प्रावधान है. भ्रामक विज्ञापन और झूठी लोकप्रियता फैलाने पर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे.

बैंक गारंटी और वैधता की शर्तें
लेटर ऑफ इंटेंट मिलने के तीस दिन के भीतर छह वर्ष की अवधि के लिए बैंक गारंटी जमा करनी होगी. नगर निगम क्षेत्र में कोचिंग सेंटर खोलने पर पांच लाख रुपये की बैंक गारंटी देनी होगी. नगर पालिका और अधिसूचित क्षेत्र परिषद में यह राशि एक लाख रुपये होगी. अन्य क्षेत्रों में पचास हजार रुपये की बैंक गारंटी तय की गई है. पंजीकरण की वैधता जारी होने की तिथि से पांच वर्ष तक रहेगी.

विद्यार्थियों और ट्यूटर्स का डिजिटल पंजीकरण
सोलह वर्ष से अधिक उम्र के हर विद्यार्थी का वेब पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा और उसे CED-ID के नाम से एक विशिष्ट पंजीकरण संख्या दी जाएगी. सभी पूर्णकालिक और अंशकालिक ट्यूटर्स का भी पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी होगा. किसी परीक्षा में विद्यार्थियों की सफलता का प्रचार करते समय CED-ID और पाठ्यक्रम विवरण देना अनिवार्य होगा और इसके लिए विद्यार्थी की लिखित सहमति लेनी होगी.

शिकायत और दंड का प्रावधान
किसी भी कोचिंग सेंटर के खिलाफ विद्यार्थी, अभिभावक, ट्यूटर या कर्मी जिला समिति के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकेंगे. नियमों के उल्लंघन पर पहली बार पांच लाख रुपये तक और दूसरी बार दस लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. इसके बाद पंजीकरण रद्द किया जा सकता है. पंजीकरण रद्द होने या ब्लैक लिस्ट किए जाने के बावजूद संचालन जारी रखने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत कानूनी कार्रवाई होगी.

अनियंत्रित ढंग से चल रहे कोचिंग संस्थानों पर अंकुश लगेगा
यह कानून झारखंड में कोचिंग सेक्टर को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है. लंबे समय से अनियंत्रित ढंग से चल रहे कोचिंग संस्थानों पर इससे अंकुश लगेगा और विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता मिलेगी. प्रभावी क्रियान्वयन होने पर यह विधेयक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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