Jharkhand: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के दिशा-निर्देशों के आलोक में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, चाईबासा द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई। शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित सभागार में एक दिवसीय जिला स्तरीय मल्टी स्टेक होल्डर्स कंसल्टेशन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, मोहम्मद शाकिर के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ विधिवत उद्घाटन
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद शाकिर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारियों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़ी विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बाल अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता पर जोर
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद शाकिर ने बाल संरक्षण प्रणाली की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम 2015 और अधिनियम 2012 की बारीकियों को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों को रोकने के लिए कानून का प्रभावी क्रियान्वयन अनिवार्य है।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों और हितधारकों
से आह्वान किया कि वे अपनी कार्यशैली में इन नियमों को प्राथमिकता दें ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पीड़ित बच्चों को समय पर न्याय मिल सके।
तकनीकी सत्र में कानूनी प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने कानूनी प्रक्रियाओं पर गहन मंथन किया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अक्षत श्रीवास्तव और रेलवे दंडाधिकारी मंजीत कुमार साहू ने प्रशिक्षकों की भूमिका निभाई। उन्होंने पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि किशोर न्याय प्रणाली में संवेदनशीलता कितनी आवश्यक है।
सत्र में पीड़ितों के मुआवजे और पुनर्वास से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि पोक्सो और जेजे एक्ट के तहत पीड़ितों को न केवल कानूनी सहायता, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए भी सरकार और विधिक सेवा प्राधिकार प्रतिबद्ध है।
इस परामर्श कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले में बाल सुधार, संरक्षण और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट किया गया कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सभी विभागों को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है।