Bokaro: झारखंड की शैक्षणिक राजधानी कहे जाने वाले बोकारो से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। शहर का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित बीएस सिटी कॉलेज बंद होने की कगार पर है। बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन ने लीज का नवीकरण न होने और भारी बकाया राशि के चलते कॉलेज की लीज रद्द कर दी है।
बीएस सिटी कॉलेज 20 एकड़ जमीन पर स्थापित
बीएस सिटी कॉलेज 20 एकड़ जमीन पर स्थापित है।बोकारो स्टील सिटी कॉलेज बोकारो जिला का सबसे पुराना कॉलेज है। इसकी स्थापना 1970 में हुई थी। पहले यह सेक्टर-1 में संचालित होता था, बाद में बीएसएल ने इसकी स्थापना के लीज पर भूमि का आवंटन किया। इसके बाद सेक्टर-6 में इसकी स्थापना की गई। इसमें सभी संकाय आदि को मिलाकर लगभग 2500 से अधिक विद्यार्थी हैं। यहां कला, विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रदान करता है।
सरकारी कॉलेज में पढ़ने से वंचित रहना
अगर कॉलेज बंद होता है तो बोकारो में गरीब हरिजन आदिवासी अल्पसंख्यक के साथ गरीब लोगों को सरकारी कॉलेज में पढ़ने से वंचित रहना पड़ेगा। कॉलेज सरकारी होने के कारण कम फीस में बच्चों को शिक्षा दी जाती है यहां छात्रों के लिए हॉस्टल भी उपलब्ध है। यहां पढ़ने वाली आदिवासी छात्र का कहना है कि यह कॉलेज हम लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। मैं खुद भी सेल एम्पलाई की पुत्री हूँ ,मेरे साथ बहुत सारे ग्रामीण छात्र पढ़ने आते हैं।बोकारो स्टील को इस पर विचार करना चाहिए ताकि हम लोगों का शिक्षा निरंतर मिल सके।
लोगों की मांग है
कॉलेज के कर्मियों का कहना है कि हम लोग को पत्र मिलने के बाद इसकी जानकारी मुख्यमंत्री राज्यपाल से अध्यक्ष विश्वविद्यालय प्रबंधन को दी गई है कॉलेज के द्वारा एक कमेटी भी गठित की गई थी लेकिन बार-बार पत्र मिल रहा है हम लोगों की मांग है कि जिस प्रकार अन्य सरकारी विभाग को जमीन उपलब्ध कराया गया है इस तरह सरकारी कॉलेज को भी फ्री जमीन उपलब्ध कराया जाए। अगर कॉलेज बंद होता है तो काफी परेशानी होगी। बोकारो स्टील के संचार प्रमुख मणि कांत धान ने बताया कि वर्ष 2008 में 22 एकड़ जमीन का प्लीज खत्म हो चुका है रिनुअल नहीं कराया गया है, 10 करोड़ रुपया बकाया। मामला बोकारो स्टील से संबंधित नहीं है यह ते सिल मुख्यालय और सेल बोर्ड के द्वारा किया जाता है।
क्षणिक ढांचे को एक अपूरणीय क्षति
कॉलेज प्रशासन ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल और विश्वविद्यालय प्रबंधन को पत्र लिखा है। कर्मचारियों की मांग है कि जिस तरह अन्य सरकारी विभागों को जमीन आवंटित की जाती है, उसी तर्ज पर इस सरकारी कॉलेज को भी नि:शुल्क जमीन उपलब्ध कराई जाए। यदि समय रहते झारखंड सरकार और सेल प्रबंधन के बीच कोई समझौता नहीं हुआ, तो बोकारो के शैक्षणिक ढांचे को एक अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है।