Adityapur Big News: आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत शिवा नर्सिंग होम के समीप बीती रात हुई सड़क दुर्घटना ने न सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था बल्कि सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत भी उजागर कर दी. हादसे में दो बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गए. दोनों बाइक सवारों को एक चार पहिया वाहन ने टक्कर मार दी, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई.
जानकारी अनुसार टक्कर के बाद एक घायल युवक सड़क पर ही पड़ा रहा, जबकि स्थानीय लोगों की मदद से दूसरे घायल को शिवा नर्सिंग होम पहुंचाया गया. सड़क पर पड़े घायल युवक को लेकर लोग लगातार मदद के लिए दौड़ भाग करते रहे. इस दौरान न तो एम्बुलेंस समय पर पहुंची और न ही कोई त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी.
एम्बुलेंस नहीं पहुंची, नर्सिंग होम में भी नहीं मिला इलाज
दुर्घटना के बाद तुरंत एम्बुलेंस को कॉल किया गया, लेकिन समय पर एम्बुलेंस नहीं पहुंची. स्थानीय लोगों के प्रयास से जिस घायल युवक को शिवा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, वहां भी उसका इलाज शुरू नहीं किया गया. युवक नर्सिंग होम में दर्द से तड़पता रहा, लेकिन किसी तरह की चिकित्सा प्रक्रिया नहीं की गई. इसे लेकर मौके पर मौजूद लोगों में भारी नाराजगी देखी गई और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल खड़े हुए.
PCR आने के बाद दोनों घायलों को जमशेदपुर भेजा गया
कुछ समय बाद जब पीसीआर वाहन मौके पर पहुंचा, तब स्थिति और स्पष्ट हुई. सड़क पर पड़े दूसरे घायल की हालत भी गंभीर थी. शिवा नर्सिंग होम में भर्ती घायल का भी इलाज नहीं होने के कारण अंततः दोनों घायलों को जमशेदपुर के अस्पताल ले जाने का फैसला किया गया. पीसीआर वाहन में दोनों घायलों को लोड कर बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर रवाना किया गया. इस दौरान नर्सिंग होम में भर्ती घायल युवक इलाज न मिलने के कारण लगातार तड़पता रहा.
नितिन गडकरी की कैशलेस स्कीम भी कागजों में सिमटी
केंद्र सरकार की ओर से सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज की योजना लागू की गई है. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के ऐलान के अनुसार इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को सात दिन तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज नजदीकी अस्पताल में मिलना चाहिए. लेकिन आदित्यपुर की इस घटना में न तो इस योजना का लाभ मिला और न ही अस्पताल ने तत्काल इलाज की जिम्मेदारी निभाई. इससे सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच बड़ा अंतर साफ नजर आया.
कैसे हुआ हादसा
बुधवार की रात एक चार पहिया वाहन ने दो मोटरसाइकिल सवार युवकों को टक्कर मार दी थी. टक्कर के बाद दोनों युवक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया. पूरे मामले में पुलिस प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है.
आम लोगों का भरोसा टूटना स्वाभाविक
आदित्यपुर की यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की गंभीर परीक्षा है. जब 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज जैसी योजना भी मौके पर लागू नहीं हो पाती, तो आम लोगों का भरोसा टूटना स्वाभाविक है. शिवा नर्सिंग होम की लापरवाही और पुलिस प्रशासन की सुस्ती ने सिस्टम की कमजोर कड़ी को उजागर किया है. जरूरत है कि जिम्मेदारी तय हो और योजनाओं को सिर्फ घोषणा नहीं बल्कि जमीन पर प्रभावी रूप से लागू किया जाए.