जवानों की प्रतिनियुक्ति नियमों के अनुरूप नही
इस संबंध में पुलिस मुख्यालय की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। डीजीपी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि थानों में मुंशी के पद पर जैप, आईआरबी और एसआईआरबी के जवानों की प्रतिनियुक्ति नियमों के अनुरूप नहीं थी।
महिला थानों में इसी प्रकार पदस्थ किया
गौरतलब है कि यह प्रतिनियुक्ति पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में की गई थी। 29 सितंबर 2025 को जारी आदेश के तहत राज्य के विभिन्न जिलों के थानों में 212 जवानों को मुंशी पद पर पदस्थापित किया गया था। इससे पहले जुलाई 2025 में 89 महिला सिपाहियों को महिला थानों में इसी प्रकार पदस्थ किया गया था।
अनुशंसा के बिना कोई आदेश जारी
हालांकि, इन आदेशों को लेकर पुलिस विभाग के भीतर ही गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। जैप की एडीजी प्रिया दुबे ने इन प्रतिनियुक्तियों का खुलकर विरोध किया था। उन्होंने इसे सेवा नियमों का उल्लंघन बताते हुए कहा था कि जैप, आईआरबी और एसआईआरबी के जवानों के तबादले व प्रतिनियुक्ति के लिए एक निर्धारित समिति होती है, जिसकी अनुशंसा के बिना कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
एडीजी प्रिया दुबे ने यह भी स्पष्ट किया था कि थानों में मुंशी के पद पर पदस्थापन का अधिकार जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को होता है, न कि सीधे पुलिस मुख्यालय को। इस संबंध में उन्होंने 2 अक्टूबर 2025 को डीआईजी कार्मिक को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने पदभार संभालने के बाद
वर्तमान डीजीपी तदाशा मिश्रा ने पदभार संभालने के बाद पूरे मामले की गहन समीक्षा की। समीक्षा के बाद उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि पूर्व में जारी प्रतिनियुक्ति आदेश नियमसम्मत नहीं थे, जिसके आधार पर उन्हें रद्द करने का निर्णय लिया गया।