Jharkhad News: चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के 10 महीने गुजर जाने के बाद भी राज्य सरकार बजट खर्च के मोर्चे पर पीछे नजर आ रही है. अब तक कुल बजट का केवल 45 फीसदी ही खर्च हो सका है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विकास योजनाओं में अब तक 6,9015 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. जबकि कुल बजट का आकार 14,5400 करोड़ रुपए है.
केंद्र प्रायोजित योजनाओं की स्थिति और भी कमजोर दिखती है. केंद्रीय योजना मद में कुल 17,395 करोड़ रुपए का प्रावधान है. इसमें से अब तक लगभग 4,179 करोड़ रुपए ही खर्च किए जा सके हैं. यह कुल राशि का करीब 24.03 फीसदी है. राज्य योजना मद की बात करें तो इसके तहत 13,3577 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है. इसमें से 63,758 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. यह खर्च कुल राज्य योजना बजट का 47.73 फीसदी बैठता है.
विभागवार खर्च का हाल
- कृषि विभाग- बजट- 1978.44 करोड़, खर्च- 708.99 करोड़.
- पशुपालन विभाग- बजट- 380.37 करोड़, खर्च- 179.71 करोड़.
- भवन निर्माण विभाग- बजट- 761.61 करोड़, खर्च- 412.15 करोड़.
- मंत्रिमंडल समन्वय विभाग- बजट- 152.49 करोड़, खर्च- 77.28 करोड़.
- राज्यपाल सचिवालय- बजट- 19.62 करोड़, खर्च- 9.85 करोड़.
- निर्वाचन विभाग- बजट- 428.91 करोड़, खर्च- 224.98 करोड़.
- निगरानी विभाग- बजट- 57.16 करोड़, खर्च- 40.42 करोड़.
- नागर विमानन विभाग- बजट- 134.92 करोड़, खर्च- 45.55 करोड़.
- सहकारिता विभाग- बजट- 921.27 करोड़, खर्च- 598.37 करोड़.
- ऊर्जा विभाग- बजट- 10199.19 करोड़, खर्च- 4393.87 करोड़.
- उत्पाद विभाग- बजट- 67.57 करोड़, खर्च- 27.56 करोड़.
- वित्त विभाग- बजट- 1304.65 करोड़, खर्च- 265.98 करोड़.
- इंटरेस्ट पेमेंट- बजट- 6354.66 करोड़, खर्च- 350.44 करोड़.
- रिपेमेंट ऑफ लोन- बजट- 9446.69 करोड़, खर्च- 633.21 करोड़.
- पेंशन मद- बजट- 10173.12 करोड़, खर्च- 0 करोड़.
- फाइनांश ऑडिट- बजट- 7.91 करोड़, खर्च- 4.47 करोड़.
- वाणिज्यकर विभाग- बजट- 196.56 करोड़, खर्च- 75.77 करोड़.
- खाद्य आपूर्ति विभाग- बजट- 2481.34 करोड़, खर्च- 879.94 करोड़.
- वन पर्यावरण विभाग- बजट- 1862.99 करोड़, खर्च- 830.06 करोड़.
- स्वास्थ्य विभाग- बजट- 5518.63 करोड़, खर्च- 3083.72 करोड़.
- उच्च शिक्षा विभाग- बजट- 1860.06 करोड़, खर्च- 1017.80 करोड़.
- गृह विभाग- बजट- 8292.67 करोड़, खर्च- 5796.03 करोड़.
- उद्योग विभाग- बजट- 569.30 करोड़, खर्च- 170.05 करोड़.
- सूचना जनसंपर्क विभाग- बजट- 457.43 करोड़, खर्च- 257.71 करोड़.
- संस्थागत वित्त- बजट- 21.19 करोड़, खर्च- 12.18 करोड़.
- श्रम विभाग- बजट- 1070.86 करोड़, खर्च- 798.16 करोड़.
- विधि विभाग- बजट- 867.36 करोड़, खर्च- 464.70 करोड़.
- हाईकोर्ट- बजट- 245.59 करोड़, खर्च- 135.23 करोड़.
- खान विभाग- बजट- 73.23 करोड़, खर्च- 27.23 करोड़.
- अल्पसंख्यक कल्याण विभाग- बजट- 336.23 करोड़, खर्च- 112.80 करोड़.
- संसदीय कार्य विभाग- बजट- 1.79 करोड़, खर्च- 1.16 करोड़.
- विधानसभा- बजट- 164.07 करोड़, खर्च- 100.94 करोड़.
- कार्मिक विभाग- बजट- 97.97 करोड़, खर्च- 58.41 करोड़.
- जेपीएससी- बजट- 47.01 करोड़, खर्च- 14.57 करोड़.
- योजना विकास विभाग- बजट- 450.05 करोड़, खर्च- 107.66 करोड़.
- पेयजल विभाग- बजट- 3841.66 करोड़, खर्च- 368.92 करोड़.
- राजभाषा विभाग- बजट- 22.27 करोड़, खर्च- 14.92 करोड़.
- निबंधन विभाग- बजट- 24.62 करोड़, खर्च- 13.78 करोड़.
- आपदा प्रबंधन विभाग- बजट- 1300.05 करोड़, खर्च- 213.12 करोड़.
- भू-राजस्व विभाग- बजट- 832.11 करोड़, खर्च- 496.25 करोड़.
- पथ निर्माण विभाग- बजट- 5700.89 करोड़, खर्च- 2338.03 करोड़.
- ग्रामीण विकास विभाग- बजट- 6076.16 करोड़, खर्च- 2798.45 करोड़.
- तकनीकी शिक्षा विभाग- बजट- 437.71 करोड़, खर्च- 189.41 करोड़.
- साक्षरता विभाग- बजट- 6.65 करोड़, खर्च- 4.43 करोड़.
- आइटी विभाग- बजट- 324.14 करोड़, खर्च- 45.69 करोड़.
- पर्यटन विभाग- बजट- 183.64 करोड़, खर्च- 53.69 करोड़.
- परिवहन विभाग- बजट- 311.43 करोड़, खर्च- 23.32 करोड़.
- नगर विकास विभाग- बजट- 2412.32 करोड़, खर्च- 800.28 करोड़.
- जल संसाधन विभाग- बजट- 1900.81 करोड़, खर्च- 1339.03 करोड़.
- माइनर इरिगेशन विभाग- बजट 341.06 करोड़, खर्च- 201.75 करोड़.
- एसटी/एससी कल्याण विभाग- बजट 2118.74 करोड़, खर्च- 712.82 करोड़.
- कला संस्कृति विभाग- बजट 194.55 करोड़, खर्च- 98.70 करोड़.
- मत्स्य विभाग- बजट 159.76 करोड़, खर्च- 61.65 करोड़.
- डेयरी विभाग- बजट 410.35 करोड़, खर्च- 96.11 करोड़.
- ग्रामीण कार्य विभाग- बजट 5142.14 करोड़, खर्च- 2992.11 करोड़.
- पंचायती राज विभाग- बजट 768.88 करोड़, खर्च- 368.78 करोड़.
- हाउसिंग विभाग- बजट- 101.77 करोड़, खर्च- 100.50 करोड़.
- माध्यमिक शिक्षा विभाग- बजट- 4901.08 करोड़, खर्च- 2760.97 करोड़.
- प्राथमिक शिक्षा विभाग- बजट- 9126.59 करोड़, खर्च- 4989.90 करोड़.
- महिला बाल विकास विभाग- बजट- 21457.52 करोड़, खर्च- 15078.80 करोड़.
सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल
10 महीने बीत जाने के बाद भी आधे से कम बजट खर्च होना सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. विकास योजनाओं के लिए आवंटित राशि जमीन पर क्यों नहीं उतर पा रही है. पेंशन जैसे जरूरी मद में खर्च शून्य कैसे है. क्या प्रशासनिक सुस्ती और योजना क्रियान्वयन की कमजोर तैयारी इसके लिए जिम्मेदार है. ग्रामीण विकास पेयजल परिवहन और आपदा प्रबंधन जैसे अहम विभागों में कम खर्च यह संकेत देता है कि आम लोगों से जुड़े मुद्दे प्राथमिकता में नहीं हैं. बजट लाने से ज्यादा जरूरी उसका समय पर और सही उपयोग है. सवाल यह है कि झारखंड सरकार इन आंकड़ों से क्या सबक लेगी या यह स्थिति ऐसे ही बनी रहेगी.