World Rat Day: हर साल 4 अप्रैल को "World Rat Day" मनाया जाता है. आमतौर पर चूहों को लोग परेशानी का कारण मानते हैं, लेकिन इन छोटे जीवों का इतिहास और दुनिया भर में इनका प्रभाव काफी रोचक है. विज्ञान से लेकर प्रकृति तक, चूहों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
चीन से शुरू हुआ सफर
वैज्ञानिकों के अनुसार, चूहों की उत्पत्ति मध्य या उत्तरी चीन में मानी जाती है. शुरुआत में ये सीमित क्षेत्रों तक ही थे, लेकिन धीरे-धीरे इनका विस्तार बढ़ता गया. असल बदलाव तब आया जब इंसानों ने समुद्री व्यापार शुरू किया. जहाजों में रखे सामान के साथ चूहे भी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने लगे और यही उनका वैश्विक फैलाव का कारण बना.
समुद्री यात्राओं ने बनाया "ग्लोबल ट्रैवलर"
पुराने समय में जब जहाजों के जरिए व्यापार होता था, तो चूहे खाने-पीने के सामान और लकड़ी के बक्सों में छिपकर सफर करते थे. यही वजह है कि वे एशिया से निकलकर यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच गए. आज शायद ही दुनिया का कोई हिस्सा हो, जहां चूहों की मौजूदगी न हो. चूहों की सबसे बड़ी खासियत उनकी तेजी से बढ़ने वाली आबादी है. 18वीं सदी के दौरान जब व्यापार अपने चरम पर था, तब इनकी संख्या तेजी से बढ़ी. ब्लैक रैट और ब्राउन रैट जैसी प्रजातियां पूरी दुनिया में फैल गईं और देखते ही देखते इनकी संख्या लाखों-करोड़ों तक पहुंच गई.
चौंकाने वाले तथ्य
चूहों से जुड़ी कई बातें हैरान कर देने वाली हैं,
चूहे खेलते समय एक खास तरह की आवाज निकालते हैं, जिसे उनकी “हंसी” माना जाता है, इनके दांत जीवनभर बढ़ते रहते हैं, इसलिए वे चीजों को लगातार कुतरते रहते हैं, उनकी याददाश्त बहुत तेज होती है, एक बार रास्ता पहचान लिया तो भूलते नहीं, ये लंबे समय तक बिना पानी के भी जीवित रह सकते हैं, चूहे सामाजिक होते हैं और अकेलेपन में तनाव का शिकार हो सकते हैं.
क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड रैट डे
इस दिन को मनाने की शुरुआत 2002 में हुई थी. इसका उद्देश्य चूहों को सिर्फ गंदगी फैलाने वाले जीव के रूप में देखने की सोच को बदलना है. विज्ञान की दुनिया में चूहों का योगदान बहुत बड़ा है. मेडिकल रिसर्च में इनका इस्तेमाल कर कई अहम खोजें की गई हैं, जिससे मानव जीवन को बचाने में मदद मिली है.
दो पहलू-फायदा और नुकसान
एक तरफ जहां चूहे वैज्ञानिक शोध में मददगार हैं, वहीं आम जीवन में ये परेशानी का कारण भी बनते हैं. घरों और खेतों में ये नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए लोग इन्हें नियंत्रित करने के उपाय तलाशते रहते हैं.
चूहे छोटे जरूर हैं, लेकिन उनका प्रभाव बहुत बड़ा है. वर्ल्ड रैट डे हमें यह समझने का मौका देता है कि इन जीवों का महत्व क्या है और इनके साथ जुड़ी चुनौतियों को कैसे संतुलित किया जाए.