Ranchi News: झारखंड में छात्रों के आंदोलन को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार और झामुमो पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन लोगों के हक-अधिकार और जनहित के मुद्दों पर आंदोलन करते हुए बिताया, लेकिन आज उनकी राजनीतिक विरासत का दावा करने वाली सरकार छात्रों के विरोध प्रदर्शन के प्रति सख्त रवैया अपना रही है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिस जनआंदोलन और जनता की आवाज के बल पर शिबू सोरेन ने अपनी अलग पहचान बनाई, आज उसी तरह अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने झामुमो कार्यकर्ताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आंदोलनकारी छात्रों में उन्हें सिर्फ पत्थर नजर आ रहे हैं। ऐसे में वे किस आधार पर खुद को शिबू सोरेन का शिष्य बताते हैं।
शिबू सोरेन की आंदोलनकारी विरासत का किया जिक्र
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि शिबू सोरेन ने लोकतांत्रिक आंदोलनों और जनसंघर्ष की एक लंबी परंपरा स्थापित की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उसी विरासत का इस्तेमाल अब छात्रों को डराने और उनकी आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
मरांडी ने सरकार से छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को सत्ता के अहंकार से बाहर निकलकर युवाओं और छात्रों की परेशानियों को समझना चाहिए।
लाठीचार्ज के आदेश पर भी उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज करने और उनका पुतला छीनने का आदेश किस अधिकारी ने दिया था। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री इस मामले में डीजीपी से जवाब नहीं मांगते हैं, तो जनता इसे सरकार की सहमति के रूप में देखेगी।
उन्होंने न्यायपालिका से भी पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता और छात्रों की आवाज को दबाने का मामला गंभीर है और ऐसी घटनाओं पर न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना चाहिए।