Khunti News:खूंटी जेल में कैदियों को मिलने वाली फोन कॉल और मुलाकात की सुविधा करीब दो सप्ताह तक बंद रखी गई. यह कदम जेल के अंदर हुए हंगामे और मारपीट की घटनाओं के बाद प्रशासन ने उठाया था. अब स्थिति सामान्य होने पर यह सुविधा फिर बहाल कर दी गई है.
अभद्र व्यवहार के आरोप से शुरू हुआ विवाद, आश्वासन के बाद भी भड़का मामला
जानकारी के अनुसार, एक जेल कर्मी विनोद पांडेय पर कैदियों के साथ अभद्र व्यवहार और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगा, जिसके विरोध में कैदियों ने हड़ताल शुरू कर दी. उस समय जेल प्रशासन ने पांडेय को जेल के अंदर ड्यूटी नहीं देने का भरोसा दिया, जिसके बाद हड़ताल खत्म हो गई. हालांकि बाद में उन्हें दोबारा अंदर ड्यूटी दिए जाने से कैदी नाराज हो गए और फिर से हंगामा शुरू हो गया.
मारपीट, सुविधाओं पर रोक और तबादले का प्रस्ताव-फिर बहाली
हंगामे के बाद जेल प्रशासन ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए 10-12 कैदियों की पिटाई की. इनमें अमर गुड़िया, फटका, सनिका पाहन, बिरसा तंबा, अंकित सिंह पादरी, दूपन और तोपन कांडुलना समेत अन्य शामिल बताए जाते हैं. इसके बाद फोन कॉल और मुलाकात की सुविधा दो सप्ताह के लिए बंद कर दी गई. साथ ही प्रशासन ने 10-12 कैदियों को दूसरे जेल में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव उपायुक्त को भेजा, लेकिन कारण स्पष्ट नहीं होने पर प्रस्ताव खारिज कर दिया गया. बाद में कैदियों से हंगामा नहीं करने की शर्त पर अप्रैल के पहले सप्ताह से फोन और मुलाकात की सुविधा फिर से शुरू कर दी गई.
जेल नियम और व्यावहारिक स्थिति, सीमित संसाधनों में दी जाती है सुविधा
जेल मैनुअल के अनुसार, हर कैदी को पांच फोन नंबर दर्ज कराने होते हैं, जिन पर वह कॉल कर सकता है. नियम के तहत रोजाना 15 मिनट बात करने की अनुमति है और पांच मिनट की बातचीत पर दो रुपये शुल्क लिया जाता है, जो जेल खाते में जमा होता है. हालांकि कैदियों की संख्या अधिक और फोन बूथ सीमित होने के कारण सभी को रोज यह सुविधा नहीं मिल पाती. आमतौर पर कैदियों को सप्ताह में दो से तीन बार ही कॉल करने का मौका दिया जाता है, ताकि सभी को अपने परिवार या वकील से संपर्क का अवसर मिल सके.
खूंटी जेल की यह घटना प्रशासनिक प्रबंधन और कैदियों के बीच तालमेल की चुनौती को उजागर करती है. फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन ऐसे मामलों में पारदर्शिता और संतुलित कार्रवाई जरूरी मानी जा रही.