Jharkhand Politics: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने बयान में उन्होंने पूछा कि झारखंड सरकार के खजाने से 10 हजार करोड़ रुपये आखिर गए कहां. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अव्यवस्था ने राज्य को आर्थिक संकट की ओर धकेल दिया है.
शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा
मरांडी ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने लिखा कि राज्य के शिक्षा विभाग के पास शिक्षकों को वेतन देने तक के लिए पर्याप्त राशि नहीं बची है. हालात यह हैं कि 10 जिलों में हाई स्कूल शिक्षकों को पिछले छह महीनों से वेतन नहीं मिला है. 161 शिक्षक और कर्मचारियों के वेतन के रूप में 6.18 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं. इसके साथ ही छात्रवृत्ति, पोशाक योजना, मिड-डे मील, किताबों की आपूर्ति और अन्य शैक्षणिक योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं.
बड़े पैमाने पर लूट और कमीशनखोरी हुई
उन्होंने आरोप लगाया कि विकास योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर लूट और कमीशनखोरी हुई है. मरांडी का कहना है कि राज्य का खजाना खाली होने के पीछे यही कारण है. उन्होंने यह भी दावा किया कि ऊर्जा विभाग के खाते से 100 करोड़ रुपये की हेराफेरी हो चुकी है और कुल मिलाकर 10 हजार करोड़ रुपये का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है.
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के वेतन पर रोक लगाई जाए
मरांडी ने मांग की कि जब तक शिक्षकों का बकाया वेतन नहीं चुकाया जाता, तब तक मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के वेतन पर रोक लगाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य की जनता को यह जानने का अधिकार है कि खजाने की रकम आखिर कहां खर्च हो रही है.