Jharkhand News : झारखंड में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) यानी डायल-112 सेवा को अधिक प्रभावी, हाई-टेक और तेज बनाने के लिए राज्य पुलिस ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नेक्स्ट जनरेशन ERSS (NG-ERSS) प्रोजेक्ट के तहत पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम में सुधार और आम लोगों तक त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए तकनीकी और बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
320 पुलिस वाहन हुए हाई-टेक, रांची में तैयार हुआ नया कमांड सेंटर
आपातकालीन सेवाओं को अधिक तेज और पारदर्शी बनाने के लिए 320 पुलिस वाहनों को आधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है। इनमें मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT), स्मार्टफोन और जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं, जिससे संकट की स्थिति में पुलिस कम समय में घटनास्थल तक पहुंच सकेगी।
वहीं, NG-ERSS के लिए आवश्यक हार्डवेयर इंस्टॉलेशन और सर्वर सेटअप का कार्य पूरा कर लिया गया है। अब पूरे सिस्टम को रांची में बने नए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में स्थानांतरित किया जा रहा है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा।
पुलिसकर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण, नए वाहन भी हुए शामिल
राज्य के सभी जिलों और विभिन्न इकाइयों से जुड़े ERSS और डायल-112 कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य NG-ERSS के परिचालन मानकों को बेहतर बनाना और पुलिसकर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रशिक्षित करना है।
झारखंड पुलिस ने NG-ERSS के तहत कई नए वाहनों को भी शामिल किया है। आम लोगों के बीच पहचान आसान बनाने के लिए इन वाहनों पर डायल-112 के विशेष स्टिकर लगाए गए हैं।
932 नए टैबलेट और स्मार्टफोन से बढ़ेगी कार्रवाई की रफ्तार
राज्यभर में आपातकालीन सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए 932 नए MDT टैबलेट और स्मार्टफोन पुलिस थानों, पीसीआर वाहनों, हाईवे पेट्रोलिंग यूनिट, रेलवे पुलिस, फायर ब्रिगेड और कंपोजिट कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराए गए हैं। ये नए उपकरण पुराने और धीमे डिवाइस की जगह लेकर डायल-112 सेवा को अधिक प्रभावी बनाएंगे।
फीडबैक सिस्टम से होगी सेवाओं की निगरानी
डायल-112 सेवा को अधिक जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए अब शिकायतों के निस्तारण के बाद लोगों से सीधे फीडबैक लिया जा रहा है। रांची स्थित सेंट्रल डायल-112 कंट्रोल डेस्क शिकायतकर्ताओं से फोन पर संपर्क कर सेवा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी ले रही है, ताकि आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में लगातार सुधार किया जा सके।