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  • 2026-06-26

Jharkhand News: झारखंड में शराब फैक्ट्रियों के लिए नई SOP लागू, मास फ्लो मीटर की निगरानी होगी सख्त

Jharkhand News: झारखंड में शराब निर्माण इकाइयों की निगरानी को और पारदर्शी बनाने के लिए उत्पाद विभाग ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है. डिस्टलरी, ब्रीवरी, माइक्रो ब्रीवरी और अन्य शराब निर्माण इकाइयों में लगे मास फ्लो मीटर (Mass Flow Meter) समेत सभी महत्वपूर्ण उपकरणों के संचालन, रखरखाव और निगरानी को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.

विभाग ने यह फैसला हाल के निरीक्षणों के दौरान कई इकाइयों में मास फ्लो मीटर के सही तरीके से काम नहीं करने की शिकायत मिलने के बाद लिया है. सभी जिलों के सहायक आयुक्तों और उत्पाद अधीक्षकों को नई एसओपी का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है.

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक शराब और बीयर निर्माण इकाई को मास फ्लो मीटर, रडार लेवल ट्रांसमीटर (Radar Level Transmitter) तथा सेंसर आधारित बोतल काउंटर (Sensor Based Bottle Counter) लगाए जाने की जानकारी संबंधित प्रभारी उत्पाद पदाधिकारी को देनी होगी. इसके साथ लाइसेंसधारी को शपथ पत्र भी जमा करना होगा. संबंधित पदाधिकारी सत्यापन के बाद इसकी रिपोर्ट विभाग को भेजेंगे.

बिना अनुमति कोई उपकरण नहीं हटाया जा सकेगा
विभाग ने सभी इकाइयों के लिए इन उपकरणों का वार्षिक रखरखाव (Annual Maintenance) अनिवार्य कर दिया है, ताकि उनकी कार्यक्षमता बनी रहे. यदि किसी भी मशीन या उपकरण में तकनीकी खराबी आती है तो उसकी तत्काल लिखित सूचना प्रभारी उत्पाद पदाधिकारी को देना जरूरी होगा. विभाग की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी उपकरण को हटाने या नष्ट करने की अनुमति नहीं होगी.

NABL से हर साल करानी होगी जांच
एसओपी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी तकनीकी उपकरणों की शुद्धता और कार्यक्षमता की जांच नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (NABL) से मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से करानी अनिवार्य होगी.



इसके अलावा उत्पाद विभाग ने उन शराब निर्माण इकाइयों और बॉटलिंग प्लांटों को भी निर्देश जारी किया है, जिन्होंने अब तक अपने संयंत्र का लेआउट और तकनीकी विवरण उपलब्ध नहीं कराया है. ऐसे सभी प्रतिष्ठानों को स्टोरेज यूनिट, फर्मेंटेशन यूनिट, बॉटलिंग लाइन सहित प्लांट की पूरी संरचना और आवश्यक तकनीकी जानकारी विभाग को उपलब्ध करानी होगी. इससे उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी और नियामकीय व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकेगा.
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