Jharkhand News: झारखंड के चाईबासा और हजारीबाग जिलों में हिंसक हाथियों के बढ़ते हमलों को देखते हुए राज्य सरकार ने कर्नाटक से छह प्रशिक्षित “कुनकी” हाथियों को बुलाने का निर्णय लिया है. ये विशेष हाथी बेलगाम हो चुके जंगली हाथियों को नियंत्रित करने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से वापस जंगलों में खदेड़ने में मदद करेंगे.
हिंसक हाथियों का कहर और कुनकी की भूमिका
पिछले एक महीने के भीतर राज्य में हाथियों के हमले से 25 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें चाईबासा सबसे अधिक प्रभावित रहा है. वन विशेषज्ञों के अनुसार, व्यस्क नर हाथियों में हार्मोनल बदलाव (टेस्टेस्टेरान स्तर बढ़ने) के कारण वे हिंसक हो जाते हैं. “कुनकी” (फारसी शब्द जिसका अर्थ “सहायक” है) प्रशिक्षित हाथी होते हैं, जो अपने विशेष व्यवहार और गंध के जरिए इन बौराए हाथियों को शांत करने या उन्हें प्रेमजाल में फंसाकर काबू करने में सक्षम होते हैं. कर्नाटक सरकार की सहमति के बाद ये हाथी जल्द ही प्रशिक्षित महावतों और विशेषज्ञों की टीम के साथ झारखंड पहुंचेंगे.
हाथियों के हिंसक होने के मुख्य कारण
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के जंगलों का दायरा सिमटने से हाथियों के प्राकृतिक भोजन स्रोतों में कमी आई है. एक हाथी को दिन में लगभग 17 घंटे भोजन की आवश्यकता होती है. जंगलों में संसाधनों की कमी के कारण ये झुंड खेतों और बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें आसानी से फसलें और फल उपलब्ध हो जाते हैं. इस प्रक्रिया में क्षेत्र को लेकर होने वाली प्रतिस्पर्धा के कारण कुछ नर हाथी झुंड से अलग होकर हिंसक हो जाते हैं, जो जनहानि का बड़ा कारण बनते हैं.
मानव-वन्यजीव संघर्ष का समाधान
कर्नाटक से कुनकी हाथियों को बुलाना झारखंड के वन विभाग का एक सराहनीय और तकनीकी रूप से सटीक कदम है. यह रणनीति न केवल इंसानों की जान बचाने में कारगर सिद्ध होगी, बल्कि जंगली हाथियों को बिना चोट पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पुनः स्थापित करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी. हालांकि, दीर्घकालिक समाधान के लिए सिमटते जंगलों और हाथियों के “एलिफेंट कॉरिडोर” को सुरक्षित करना अनिवार्य है, ताकि वन्यजीवों को भोजन के लिए बस्तियों का रुख न करना पड़े.