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  • 2026-03-11

Jharkhand News: गुरुग्राम हादसे में पोटका के चार मजदूरों की मौत से बनगोड़ा गांव में छाया मातम

Jharkhand News: हरियाणा के गुरुग्राम में एक निर्माण स्थल पर हुए भीषण हादसे ने झारखंड के पोटका प्रखंड में दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है. मिट्टी धंसने की इस घटना में कुल सात मजदूरों की जान चली गई, जिनमें से चार मृतक पोटका की हाथीबिंदा पंचायत के बनगोड़ा गांव के रहने वाले थे. हादसे की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और हर आंख नम है.

काम के दौरान हुआ भयानक हादसा
यह दर्दनाक हादसा सोमवार की शाम को गुरुग्राम की सिग्नेचर ग्लोबल सोसायटी कंपनी में हुआ. वहां सिविल कार्य के दौरान अचानक मिट्टी धंस गई, जिसकी चपेट में आने से सात मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों में बनगोड़ा के चार युवकों के अलावा दो मजदूर चांडिल के और एक राजस्थान का रहने वाला बताया जा रहा है. इस घटना में चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं.

मृतकों की हुई पहचान
हादसे का शिकार हुए पोटका के मजदूरों की पहचान धनंजय महतो, भागीरथ गोप, संजीत गोप और मंगल महतो के रूप में की गई है. ये सभी मजदूर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए घर से दूर हरियाणा गए थे. वर्तमान में चारों मजदूरों के शव घटनास्थल के पास ही रखे होने की सूचना मिली है, जिन्हें घर लाने की प्रक्रिया शुरू की जानी है.

दोस्त की आंखों देखी और किस्मत का साथ
गांव के ही समीर महतो और राकेश महतो भी उसी कंपनी में काम कर रहे थे, लेकिन हादसे के समय वे किसी अन्य काम से बाहर गए हुए थे जिससे उनकी जान बच गई. राकेश ने बताया कि वे पहले भी इस कंपनी में काम कर चुके थे और मकर संक्रांति पर घर लौटे थे. सरस्वती पूजा के बाद ही वे सभी फिर से काम पर वापस लौटे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह उनका आखिरी सफर होगा.

परिवारों का टूटा सहारा
मृतक मजदूरों के पीछे उनके छोटे-छोटे बच्चे और बेसहारा परिवार रह गए हैं. भागीरथ गोप अपने पीछे पत्नी और चार बच्चों को छोड़ गए हैं, जबकि धनंजय महतो के दो छोटे बेटे हैं जिनकी उम्र मात्र एक और दो साल है. मंगल महतो का भी चार साल का एक बेटा है. संजीत गोप के माता-पिता का अपने इकलौते सहारे को खोने के बाद रो-रोकर बुरा हाल है.

गांव में शादियों की खुशियां मातम में बदलीं
बनगोड़ा गांव में इस समय सन्नाटा पसरा हुआ है. मंगलवार को गांव में दो विवाह समारोह निर्धारित थे, लेकिन इस त्रासदी के बाद वहां कोई उत्साह नहीं दिखा. ग्रामीणों ने आपसी सहमति से तय किया कि किसी भी घर में गाना-बजाना नहीं होगा. शादियों की रस्में बिल्कुल सादे तरीके से पूरी की जा रही हैं और पूरा गांव शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ा है.
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