Jamshedpur: करनडीह थाना क्षेत्र के गैताडीह इलाके में रविवार दोपहर एक साधारण सड़क दुर्घटना ने अचानक तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी। शुरुआत में यह एक मामूली हादसा था, लेकिन देखते ही देखते यह विवाद में बदल गया और सड़क पर हंगामे की स्थिति बन गई। जानकारी के अनुसार, चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी अपनी बैठक से लौट रहे थे, तभी उनकी कार ने ओडिशा जा रहे एक परिवार की गाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे के बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जिससे माहौल गर्म हो गया।
बतखों के कारण अचानक ब्रेक, फिर हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे की असली वजह सड़क पर अचानक आए बतखों का झुंड था। आगे चल रही कार के चालक ने जानवरों को बचाने के लिए अचानक ब्रेक लगा दिया। पीछे से आ रही तेज रफ्तार कार समय पर नियंत्रित नहीं हो सकी और आगे वाली गाड़ी से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि आगे की कार का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
मुआवजे को लेकर सड़क पर हंगामा
हादसे के बाद ओडिशा जा रहे परिवार के लोग काफी नाराज हो गए और उन्होंने मौके पर ही मुआवजे की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिवार की ओर से 15 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की गई, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया। कुछ देर के लिए सड़क पर भीड़ जमा हो गई और यातायात प्रभावित होने लगा।
आरपीएफ और पुलिस के हस्तक्षेप से संभली स्थिति
स्थिति बिगड़ते देख रेलवे अधिकारी की ओर से आरपीएफ को सूचना दी गई, जिसके बाद मौके पर जवान पहुंचे। साथ ही स्थानीय पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर थाने ले गई। पुलिस की मौजूदगी में बातचीत का दौर शुरू हुआ और मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश की गई।
जांच में सामने आया निजी एजेंसी का मामला
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि संबंधित सरकारी वाहन वास्तव में एक निजी एजेंसी के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। इसके बाद एजेंसी के प्रतिनिधियों को भी बातचीत में शामिल किया गया। काफी देर तक चली बातचीत के बाद आखिरकार आपसी सहमति बनी और एजेंसी की ओर से 6 हजार रुपये मुआवजे के रूप में दिए गए।
समझौते के बाद खत्म हुआ विवाद
मुआवजा मिलने के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त कर दिया। इसके बाद माहौल सामान्य हुआ और सड़क पर यातायात भी धीरे-धीरे सुचारु हो गया। यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि छोटी-सी लापरवाही या अचानक हुई स्थिति कैसे बड़े विवाद का रूप ले सकती है, और समय रहते समझदारी से हल निकालना कितना जरूरी होता है।