JTDC Scam: झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) के खजाने में लगी 10.40 करोड़ की सेंध ने अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) को हरकत में ला दिया है. एजेंसी ने इस वित्तीय वर्ष का अपना पहला केस (ECIR 1/2026) दर्ज कर लिया है. मनी लॉन्ड्रिंग के तहत शुरू हुई इस जांच में तत्कालीन लेखापाल गिरजा प्रसाद सिंह और केनरा बैंक के मैनेजरों सहित कई बड़े चेहरे नामजद किए गए हैं. अब इस लूट के पीछे छिपे सिंडिकेट का कच्चा चिट्ठा खुलेगा.
फर्जी दस्तखत और करोड़ों का खेल
इस महाघोटाले की पटकथा किसी थ्रिलर फिल्म जैसी है. जून 2023 में निगम के एमडी के फर्जी साइन का इस्तेमाल कर केनरा बैंक की हटिया शाखा में एक अवैध खाता खोला गया. इसके बाद अक्टूबर में सरकारी तिजोरी से 10.40 करोड़ रुपये इस फर्जी खाते में धकेले गए. पूरी साजिश इतनी शातिराना थी कि सरकारी सिस्टम और बैंकिंग सिक्योरिटी को भनक तक नहीं लगने दी गई.
रुपये खपाने का “बंगाल कनेक्शन”
हैरानी की बात यह है कि लूट की इस रकम को रांची और पतरातू के निजी बैंक खातों में पानी की तरह बहाया गया, जहां से तुरंत कैश निकालकर उसे रफूचक्कर कर दिया गया. ईडी की रडार पर अब पश्चिम बंगाल के कुछ संदिग्ध कारोबारी भी हैं, जिन्होंने इस अवैध पैसे को खपाने में अहम भूमिका निभाई. एजेंसी अब उन कड़ियों को जोड़ रही है, जो इस घोटाले को अंतरराज्यीय नेटवर्क से जोड़ती हैं.
यह मामला रांची के धुर्वा थाने से शुरू होकर सीआईडी और एटीएस तक पहुंचा, लेकिन अब ईडी की एंट्री ने घोटालेबाजों की नींद उड़ा दी है. चूंकि यह सरकारी पैसे की हेराफेरी का गंभीर मामला है, इसलिए ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस बंदरबांट का असली मास्टरमाइंड कौन है. आने वाले दिनों में कई रसूखदारों को पूछताछ के लिए समन भेजा जा सकता है.