Gamharia: गम्हरिया प्रखंड की आंगनबाड़ी सेविकाएं पिछले सात महीनों से पोषाहार राशि नहीं मिलने के कारण गंभीर परेशानियों का सामना कर रही हैं। लगातार भुगतान लंबित रहने से केंद्र सरकार और राज्य सरकार की बाल विकास एवं पोषण योजनाओं का संचालन प्रभावित होने लगा है। सेविकाओं का कहना है कि बिना राशि के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए नियमित रूप से पोषाहार उपलब्ध कराना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द लंबित राशि जारी करने की मांग की है।
सेविकाओं ने कहा- बिना संसाधन केंद्र चलाना हो रहा मुश्किल
आंगनबाड़ी सेविका अनुराधा ने बताया कि पिछले सात महीनों से जिले में पोषाहार मद की राशि का आवंटन नहीं हुआ है, जबकि आसपास के कई जिलों में नियमित रूप से भुगतान किया जा रहा है। उनका कहना है कि केंद्रों के संचालन के लिए आवश्यक सामग्री और पोषण व्यवस्था बिना फंड के संभव नहीं हो पा रही है। सेविकाओं के अनुसार वे किसी तरह व्यवस्था संभाल रही हैं, लेकिन लंबे समय तक इस स्थिति में काम करना मुश्किल होता जा रहा है।
मानदेय भुगतान में भी अनियमितता से बढ़ी परेशानी
सेविकाओं ने यह भी बताया कि सिर्फ पोषाहार राशि ही नहीं, बल्कि उनके मानदेय भुगतान में भी लगातार अनियमितता बनी हुई है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि नियमित काम करने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं मिलने से मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ रही हैं। कई सेविकाओं ने कहा कि वे पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने केंद्रों का संचालन कर रही हैं, लेकिन लगातार भुगतान अटकने से हालात गंभीर होते जा रहे हैं।
भ्रष्टाचार के आरोपों को बताया बेबुनियाद
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोपों को सेविकाओं ने पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। अनुराधा ने कहा कि लाभार्थियों से पैसे लेने जैसी बातें सच्चाई से परे हैं, क्योंकि अब अधिकांश योजनाओं का भुगतान सीधे ऑनलाइन माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाता है। ऐसे में किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना नहीं है। सेविकाओं ने कहा कि वे पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम कर रही हैं और उन पर लगाए जा रहे आरोप उनकी छवि खराब करने की कोशिश हैं।
जल्द भुगतान नहीं हुआ तो योजनाएं होंगी प्रभावित
आंगनबाड़ी सेविकाओं ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि अगर पोषाहार राशि और बकाया मानदेय का भुगतान समय पर नहीं किया गया तो इसका सीधा असर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए जरूरी है कि सेविकाओं को समय पर संसाधन और भुगतान उपलब्ध कराया जाए।