Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-03-23

Chaiti Chhath 2026: छठ महापर्व का दूसरा दिन खरना आज, व्रतियों का 36 घंटे का कठिन उपवास होगा शुरू

Chaiti Chhath 2026: छठ पूजा के दूसरे दिन मनाया जाने वाला खरना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रती विशेष रूप से शुद्धता और नियमों का पालन करते हैं, ताकि पूजा में किसी प्रकार की बाधा न आए। दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को विधि-विधान से पूजा कर प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

मिट्टी के चूल्हे पर बनता है प्रसाद
खरना के अवसर पर व्रती महिलाएं पारंपरिक तरीके से मिट्टी के चूल्हे का उपयोग कर प्रसाद तैयार करती हैं। आम की लकड़ी से चूल्हा जलाकर गुड़, दूध और चावल से खीर बनाई जाती है। इसके साथ घी लगी रोटी और फल भी प्रसाद के रूप में तैयार किए जाते हैं।

शाम को पूजा के बाद ग्रहण किया जाता है प्रसाद
सूर्यास्त के बाद व्रती स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और छठी मैया व सूर्य देव की पूजा करते हैं। इसके बाद प्रसाद अर्पित कर उसे ग्रहण किया जाता है। यही प्रसाद आगे परिवार और अन्य लोगों में भी वितरित किया जाता है।

36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू
खरना के बाद व्रतियों का सबसे कठिन चरण शुरू होता है। प्रसाद ग्रहण करने के पश्चात 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ हो जाता है, जिसमें न तो भोजन किया जाता है और न ही जल ग्रहण किया जाता है।

संध्या और उषा अर्घ्य का विशेष महत्व
इस महापर्व में डूबते और उगते सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है। 24 मार्च को व्रती महिलाएं संध्या अर्घ्य देंगी, जबकि 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया जाएगा।

चार दिनों तक चलता है यह महापर्व
चैत्र माह में मनाया जाने वाला यह पर्व "चैती छठ" के नाम से जाना जाता है। इसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसमें व्रती सादा और पवित्र भोजन ग्रहण करते हैं। इसके बाद खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के साथ यह चार दिवसीय पर्व संपन्न होता है।

खरना की पूजा विधि
खरना के दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहने जाते हैं और पूरे दिन उपवास रखा जाता है। शाम को पूजा स्थल को शुद्ध कर गंगाजल से पवित्र किया जाता है। सूर्यास्त के बाद प्रसाद तैयार कर विधिपूर्वक पूजा की जाती है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत शुरू होता है, जो अंतिम दिन अर्घ्य देने के बाद ही समाप्त होता है। 
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !