Aaj Ka Panchang: वैदिक पंचांग के अनुसार आज गायत्री जयंती और निर्जला एकादशी का दुर्लभ संयोग बना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गायत्री जयंती को वेद माता गायत्री के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है, जबकि निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। इस वर्ष यह पर्व गुरुवार को पड़ रहा है और दिनभर भक्त पूजा, जप और व्रत के माध्यम से पुण्य अर्जित करेंगे। आज सूर्य देव मिथुन राशि और चंद्रदेव तुला राशि में विराजमान हैं, वहीं शिव योग का भी शुभ संयोग बन रहा है।
शुभ योग, नक्षत्र और ग्रहों की विशेष स्थिति
आज शुक्ल एकादशी तिथि रात्रि 8:09 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी। शिव योग प्रातः 10:54 बजे तक रहेगा, जिसके बाद सिद्ध योग लगेगा। चंद्रमा स्वाती नक्षत्र में सायं 4:29 बजे तक रहेंगे, फिर विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। सूर्योदय प्रातः 5:25 बजे और सूर्यास्त सायं 7:23 बजे होगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:56 बजे से 12:52 बजे तक तथा अमृत काल प्रातः 6:46 बजे से 8:32 बजे तक रहेगा, जबकि राहुकाल दोपहर 2:09 बजे से 3:53 बजे तक रहेगा।
वेद माता गायत्री की महिमा और आध्यात्मिक महत्व
हिंदू संस्कृति में गायत्री जयंती का विशेष महत्व है। मान्यता है कि माता गायत्री समस्त वेदों की जननी और ब्रह्म के दिव्य गुणों का साक्षात स्वरूप हैं। उन्हें देवताओं की माता तथा मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां पार्वती का संयुक्त स्वरूप भी माना जाता है। इस दिन गायत्री मंत्र के जप, यज्ञ और पूजा-पाठ से ज्ञान, बुद्धि, आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
निर्जला एकादशी व्रत से मिलता है सभी एकादशियों का पुण्य
निर्जला एकादशी को वर्ष की 24 एकादशियों में सबसे फलदायी माना गया है। “निर्जला” का अर्थ बिना जल के होता है और इस दिन श्रद्धालु अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखकर सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त कर सकता है। इस व्रत का पारण 26 जून को प्रातः 5:25 बजे से 8:13 बजे के बीच किया जाएगा। यह पर्व आत्मिक शुद्धि, संयम और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।