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  • 2026-01-04

MLA Jairam Mahato: 10 साल पुराने केस में टाइगर जयराम महतो को मिली बड़ी राहत, धनबाद कोर्ट ने सभी 13 आरोपियों को किया बरी

Dhanbad: झारखंड की राजनीति के उभरते चेहरे और डुमरी विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक टाइगर जयराम महतो के लिए कानूनी मोर्चे पर शनिवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। धनबाद की एक अदालत ने करीब एक दशक पुराने सड़क जाम, आगजनी और जानलेवा हमले से जुड़े मामले में जयराम महतो समेत सभी 13 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है।

आइए जानते हैं क्या था 10 साल पुराना मामला

यह पूरा विवाद साल 2015 का है। 15 जनवरी 2015 को तोपचांची निवासी सद्दाम हुसैन ने स्थानीय थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 14 जनवरी 2015 की दोपहर को तोपचांची बाजार के समीप जीटी रोड पर भीड़ ने हिंसक प्रदर्शन किया था। आरोप था कि जयराम महतो और अन्य समर्थकों ने हथियारबंद होकर सड़क जाम की, वाहनों में तोड़फोड़ की और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया। इसी दौरान शिकायतकर्ता सद्दाम हुसैन पर भी जानलेवा हमला कर उन्हें घायल करने का आरोप लगाया गया था।

अदालत का फैसला, सबूतों के अभाव में मिली बेनिफिट ऑफ डाउट

इस चर्चित मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत में हुई। लंबी कानूनी प्रक्रिया और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत पेश करने में पूरी तरह विफल रहा।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मामले के दौरान जांच में कई तथ्य अस्पष्ट रहे और गवाहों के बयानों में विरोधाभास दिखा। किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिलने के कारण, माननीय न्यायाधीश ने संदेह का लाभ देते हुए जयराम महतो समेत सभी 13 लोगों को बरी कर दिया।

इन लोगों को भी मिली राहत

जयराम महतो के साथ बरी होने वालों में लक्खी बोस, दीपक महतो, पप्पू महतो, अरबिंद महतो, भुनेश्वर महतो, आलोक साव, पांडेय साव, सूरज साव, जुगनू महतो, सरोज महतो, बसंत हांसदा और निरंजन मंडल शामिल हैं।

विधायक बनने के बाद पहली बड़ी कानूनी जीत

जयराम महतो, जिन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल कर पहली बार सदन में कदम रखा है, उनके लिए यह फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। समर्थकों का कहना है कि यह सच्चाई की जीत है, वहीं कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पुख्ता साक्ष्यों की कमी अक्सर ऐसे पुराने मामलों में आरोपियों के पक्ष में जाती है।
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