Current News: मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में जेल प्रशासन की बड़ी चूक सामने आई है, जहां खाचरोद स्थित सब-जेल से गंभीर अपराधों में बंद तीन कैदी फरार हो गए. सफाई कार्य के दौरान कैदियों के भाग निकलने की घटना से जेल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. पुलिस और जेल प्रशासन फरार कैदियों की तलाश में लगातार दबिश दे रहा है.
गिनती के समय हुआ खुलासा
जानकारी के अनुसार खाचरोद से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित सब जेल में तीनों कैदी सफेदी और साफ सफाई के काम में लगाए गए थे. इसी दौरान मौका पाकर तीनों जेल परिसर से फरार हो गए. घटना के समय जेल में नियमित गतिविधियां चल रही थीं. जेल प्रशासन को कैदियों के फरार होने की जानकारी उस वक्त मिली जब नियमित गिनती कराई गई. गिनती में तीन कैदी अनुपस्थित पाए गए. इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई और तलाशी अभियान शुरू किया गया.
पुलिस ने शुरू की तलाश
खाचरोद थाना प्रभारी धन सिंह नलवाया ने बताया कि जेल रिकॉर्ड में दर्ज आरोपियों के पते और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की गई, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है. आसपास के इलाकों और मुख्य मार्गों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है. स्थानीय मुखबिर नेटवर्क को भी सक्रिय कर दिया गया है. पुलिस के अनुसार फरार कैदियों में नारायण जाट उम्र 31 वर्ष शामिल है, जिस पर पोक्सो एक्ट के तहत दुष्कर्म का आरोप है. दूसरा आरोपी गोविंद उम्र 35 वर्ष है, जिस पर हत्या का मामला दर्ज है. तीसरा कैदी गोपाल लाल उम्र 22 वर्ष है, जिस पर अपहरण और दुष्कर्म के आरोप हैं.
जेल प्रशासन की सफाई
उज्जैन सेंट्रल जेल के अधीक्षक मनोज साहू ने कहा कि फरार कैदियों को पकड़ने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. पुलिस और जेल प्रशासन की संयुक्त टीम लगातार संभावित इलाकों में तलाश कर रही है. घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं. गंभीर अपराधों में बंद कैदियों को खुले में सफाई कार्य पर लगाए जाने को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है. मामले की आंतरिक जांच की संभावना जताई जा रही है.
खाचरोद सब जेल से तीन गंभीर अपराधों के आरोपियों का फरार होना न केवल जेल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि आम सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंता बढ़ाता है. ऐसे मामलों में यदि समय रहते गिरफ्तारी नहीं होती, तो यह समाज के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. यह घटना जेलों में कैदियों की निगरानी और कार्य आवंटन की नीति पर पुनर्विचार की जरूरत को रेखांकित करती है