हालांकि नगर निकाय चुनाव की औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हलचल तेज हो गई है। वार्ड सदस्य और मेयर पद के लिए आरक्षण की सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, इसके बावजूद सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने कार्यकर्ताओं और संभावित उम्मीदवारों को तैयार करने में जुटे हुए हैं।
भारतीय जनता पार्टी संभावित उम्मीदवारों को आगे बढ़ाने में लगी है और संगठन स्तर पर उन्हें समर्थन भी दिया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि आरक्षण की अधिसूचना जारी होते ही चुनावी गतिविधियां और तेज होंगी।
वहीं कांग्रेस ने भी नगर निकाय चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारी तेज कर दी है। वार्ड स्तर पर कमेटियों का गठन किया जा चुका है और अध्यक्षों की नियुक्ति भी कर दी गई है। कांग्रेस का दावा है कि पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी।
नगर निकाय चुनाव की आहट के साथ ही झारखंड की राजनीति में सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। वार्ड सदस्य से लेकर मेयर की कुर्सी तक पर सबकी नजरें टिकी हैं। झामुमो और कांग्रेस के बीच तालमेल साफ नजर आ रहा है, जबकि बीजेपी अपने दम पर मैदान में उतरने की तैयारी में है। आरक्षण की अधिसूचना के बाद चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है।