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  • 2025-12-19

Jharkhand News: झारखंड में PDS संकट गहराया, 11 महीनों से चीनी-दाल-नमक से वंचित गरीब परिवार

Jharkhand: झारखंड की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) इन दिनों गंभीर अव्यवस्था और भरोसे की कमी से जूझ रही है। राज्य के लाखों जरूरतमंद परिवारों को बीते लगभग 11 महीनों से चीनी, दाल और नमक जैसी बुनियादी खाद्य वस्तुएं नहीं मिल सकी हैं। इसका सीधा असर गरीब परिवारों की रसोई पर पड़ा है और लोग सरकारी राशन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने लगे हैं।

हालांकि खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से यह संकेत दिया गया हैं कि दाल और नमक की आपूर्ति जल्द बहाल की जा सकती है, लेकिन चीनी को लेकर स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है। बार-बार टेंडर प्रक्रिया असफल होने के कारण चीनी का वितरण पूरी तरह ठप है।

दाल और नमक को लेकर उम्मीद, चीनी बनी चुनौती

विभागीय जानकारी के अनुसार दाल की खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यदि कोई तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन नहीं आई, तो अगले 10 दिनों के भीतर दाल पीडीएस दुकानों तक पहुंच सकती है। वहीं नमक की आपूर्ति को लेकर भी फिलहाल कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आ रही है।

इसके उलट चीनी वितरण सबसे बड़ी परेशानी बनकर उभरा है। पिछले चार से पांच महीनों के दौरान तीन बार टेंडर निकाले गए, लेकिन हर बार आपूर्तिकर्ताओं की रुचि न दिखने के कारण प्रक्रिया विफल रही। इसका सीधा असर अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के लाभुकों पर पड़ा है। राज्य में लगभग 8.8 लाख AAY कार्डधारी परिवार हैं, जिनसे जुड़े 33 लाख से अधिक लोग चीनी से वंचित हैं।

सरकार तलाश रही वैकल्पिक रास्ते

सूत्रों के अनुसार दाल और नमक की आपूर्ति का रास्ता लगभग साफ हो चुका है, जबकि चीनी के लिए सरकार वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रही है। इस पूरे मामले को उच्च स्तर पर रखा गया है ताकि जल्द से जल्द कोई ठोस समाधान निकाला जा सके।

पीडीएस डीलरों की हालत भी चिंताजनक

राशन वितरण में बाधा के साथ-साथ पीडीएस दुकानदारों की समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं। पिछले आठ महीनों से कमीशन का भुगतान नहीं होने के कारण कई डीलर आर्थिक दबाव में हैं। कुछ दुकानदारों का दावा है कि उनका 13 से 15 महीनों तक का कमीशन लंबित है, जिससे जमीनी स्तर पर पीडीएस संचालन प्रभावित हो रहा है।

व्यवस्था पर उठे सवाल

खाद्य सामग्री की लगातार कमी और डीलरों को समय पर भुगतान न होना यह दर्शाता है कि पीडीएस सिर्फ आपूर्ति की नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया की भी गंभीर चुनौती से गुजर रही है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस व्यवस्था पर जनता का भरोसा दोबारा कायम करने के लिए कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाती है।



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