Jharkhand News: झारखंड में प्रदूषण पर सख्ती को लेकर हाईकोर्ट ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. हाट बाजार से लेकर बड़े सार्वजनिक आयोजनों तक पर्यावरण नियमों का पालन अनिवार्य करते हुए अदालत ने सरकार और एजेंसियों को कठोर निर्देश जारी किए हैं.
बिना अनुमति किसी भी स्थान पर हाट-बाजार नहीं
झारखंड में अब बिना अनुमति कहीं भी हाट बाजार नहीं लगाए जा सकेंगे. झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या स्थानीय निकायों की अनुमति के बिना किसी भी स्थान पर हाट-बाजार का आयोजन नहीं होगा. स्थानीय निकायों को हाट बाजार लगाने से पहले आर्थिक जमानत भी लेनी होगी.
बाजारों में प्रतिबंधित पैकेजिंग सामग्री का उपयोग न हो
अदालत ने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बाजारों में प्रतिबंधित पैकेजिंग सामग्री का उपयोग न हो. विशेष रूप से प्लास्टिक बैग और बोतलों पर पूरी तरह रोक रहेगी. जमानत की राशि तभी वापस की जाएगी जब बाजार स्थल से प्रतिबंधित सामग्री को एकत्र कर उचित तरीके से हटाया जाएगा और कहीं भी डंप नहीं किया जाएगा.
सरकार और संबंधित एजेंसियां केवल औपचारिकता निभा रही: हाईकोर्ट
हाट बाजारों में प्लास्टिक के खुले इस्तेमाल को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई. मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश राजेश शंकर की पीठ ने कहा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां केवल औपचारिकता निभा रही हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है. अदालत ने इसे प्रशासन की इच्छाशक्ति की कमी बताया.
हाईकोर्ट ने याद दिलाया कि 19 सितंबर 2025 को प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर रोक और हाट बाजारों में सख्ती को लेकर विस्तृत निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका प्रभावी अनुपालन नहीं हुआ. अदालत ने कहा कि प्लास्टिक के विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद समस्या पर नियंत्रण नहीं किया जा सका.
एनएच-33 के चौड़ीकरण के दौरान पौधरोपण को लेकर भी सवाल
अदालत ने हजारीबाग से बरही तक एनएच-33 के चौड़ीकरण के दौरान पौधरोपण को लेकर भी सवाल उठाए. एनएचएआई झारखंड के अधिकारियों से कहा गया है कि पौधरोपण में स्थानीय लोगों की भागीदारी और आठ करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के उपयोग की जानकारी दी जाए. कोर्ट ने यह भी बताने को कहा है कि कितने पौधे लगाए गए और उनमें से कितने जीवित हैं. इस मामले की अगली सुनवाई पांच जनवरी को होगी.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य
हाईकोर्ट ने सार्वजनिक आयोजनों के लिए भी सख्त नियम लागू किए हैं. अब ऐसे आयोजनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. 500 से अधिक लोगों की भागीदारी वाले आयोजनों के लिए प्रति व्यक्ति 10 रुपये की दर से अग्रिम राशि बोर्ड के पास जमा करनी होगी. आयोजन के बाद स्थल साफ और प्लास्टिक मुक्त पाए जाने पर ही यह राशि वापस की जाएगी.
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई. अदालत ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अब तक वायु, जल और ठोस कचरे से होने वाले प्रदूषण को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने में विफल रहा है, जबकि पर्यावरण संरक्षण कानूनों के क्रियान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी उसी की है.
नॉन डिग्रेडेबल प्लास्टिक बैग की बिक्री पर पूर्ण सख्ती के आदेश
हाईकोर्ट ने नॉन डिग्रेडेबल प्लास्टिक बैग की बिक्री पर पूर्ण सख्ती के आदेश दिए हैं. नगर विकास सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और सभी नगर निकाय प्रमुखों को इस संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. शहरी विकास सचिव को आदेश दिया गया है कि यह निर्देश सभी निकायों तक तत्काल पहुंचाए जाएं.
आदेशों का सख्ती से पालन हुआ तो प्लास्टिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव
हाईकोर्ट के ये निर्देश साफ करते हैं कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर अब चेतावनी नहीं बल्कि कार्रवाई का दौर शुरू हो चुका है. हाट बाजार और सार्वजनिक आयोजनों को नियमों से जोड़कर अदालत ने सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय की है. यदि इन आदेशों का सख्ती से पालन हुआ तो प्लास्टिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण संभव है, लेकिन असली चुनौती प्रशासनिक इच्छाशक्ति और निगरानी की होगी.