अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे सवाल
दरअसल, लिट्टी चौक-एनएच 33 पुल का दोबारा शिलान्यास होने पर सरयू राय ने आपत्ति जताई थी। हालांकि, बाद में उन्होंने विधायक पूर्णिमा साहू से फोन पर बात की और पूरी स्थिति स्पष्ट की। सरयू राय ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि अपने क्षेत्र की योजनाओं के प्रति किसी भी विधायक की उत्सुकता स्वाभाविक है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि असल गलती उन अधिकारियों की है, जिनका दायित्व वर्तमान विधायक को वस्तुस्थिति से अवगत कराना था।
पुत्री-बहू वाले बयान से पिघली रिश्तों की बर्फ
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब सरयू राय ने पूर्णिमा साहू के प्रति बेहद नरम रुख अपनाया। उन्होंने कहा, पूर्णिमा साहू मेरे लिए पुत्री या पुत्रवधू के समान हैं। ज्ञात हो कि सरयू राय और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के बीच के राजनीतिक मतभेद जगजाहिर हैं। ऐसे में रघुवर दास की बहू पूर्णिमा साहू के लिए सरयू राय के इन शब्दों ने जमशेदपुर की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया
NDA में मजबूती और कार्यकर्ताओं में उत्साह सरयू राय के इस बयान को राज्य की राजनीति में एनडीए की मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है। जमशेदपुर में अक्सर भाजपा और जदयू कार्यकर्ताओं के बीच खींचतान की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इस पारिवारिक और भावनात्मक जुड़ाव ने दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।
आपसी समन्वय और बड़प्पन की मिसाल
पुल के शिलान्यास का विवाद जो पहले टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा था, वह अब आपसी समन्वय और बड़प्पन की मिसाल बन गया है। सरयू राय के इस कदम से न केवल विकास कार्यों की राह आसान होगी, बल्कि एनडीए गठबंधन के भीतर भी रिश्तों की नई गर्माहट देखने को मिल रही है।