National Issues: दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर जहरीली हवा के साये में घिर गया है और हालात ऐसे हैं कि आम लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया है. केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के तमाम दावों और बैठकों के बावजूद प्रदूषण पर कोई ठोस नियंत्रण नजर नहीं आ रहा है. हर साल सर्दियों में हालात बिगड़ते हैं और सरकारें एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेती हैं. नतीजा यह है कि राजधानी और आसपास के इलाकों में लोग खुले आसमान के नीचे नहीं बल्कि धुएं की चादर में जीने को मजबूर हैं.
जहरीली हवा से रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित
दिल्ली के अधिकांश इलाकों में घनी धुंध छाई हुई है और सुबह छह बजे के आसपास विजिबिलिटी बेहद कम दर्ज की गई. कई जगहों पर हालात इतने खराब हैं कि सड़कों पर कुछ मीटर आगे तक देख पाना भी मुश्किल हो गया. इसका सीधा असर यातायात पर पड़ा है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है. जहरीली हवा ने रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है.
प्रदूषण का स्तर अब खतरनाक श्रेणी में पहुंच चुका है. रोहिणी में AQI 499 दर्ज किया गया जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है. दिल्ली के ज्यादातर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन रेड जोन में हैं जहां AQI 400 के पार बना हुआ है. समीर ऐप के मुताबिक सुबह छह बजे दिल्ली का औसत AQI 462 दर्ज किया गया. वहीं aqi.in के अनुसार हालात और ज्यादा खराब हैं और रविवार को दिल्ली का ओवरऑल AQI 645 तक पहुंच गया.
दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है. रोहिणी अलीपुर आनंद विहार अशोक विहार आया नगर बवाना बुराड़ी क्रॉसिंग चांदनी चौक डीटीयू द्वारका सेक्टर आठ आईजीआई एयरपोर्ट आईटीओ जहांगीरपुरी और सोनिया विहार जैसे क्षेत्रों में AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया है. इन इलाकों में हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है.
इन इलाकों की स्थिति बेहद चिंताजनक
दिल्ली-एनसीआर के दूसरे शहरों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. गाजियाबाद में AQI 460, गुरुग्राम में 347 और नोएडा में 472 दर्ज किया गया. एनएच-24 के पटपड़गंज, आईटीओ और आनंद विहार इलाके में हवा की मोटी जहरीली परत साफ नजर आ रही है. पटपड़गंज में AQI 488 रहा जो गंभीर श्रेणी में आता है. पूरा क्षेत्र धुएं की चादर में लिपटा हुआ दिख रहा है.
लगातार खराब वायु गुणवत्ता का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है. सांस लेने में दिक्कत आंखों में जलन गले में खराश और खांसी की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं. डॉक्टरों की सलाह है कि बिना जरूरी काम के घर से बाहर निकलने से बचें और खासतौर पर बच्चे बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग अतिरिक्त सावधानी बरतें.
प्रदूषण को काबू में करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले GRAP-3 और फिर GRAP-4 के तहत सभी सख्त कदम लागू कर दिए हैं. इसके बावजूद हालात में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा है. यह सवाल खड़ा कर रहा है कि कागजी एक्शन प्लान जमीन पर कितना असरदार साबित हो पा रहे हैं.
मास्क का इस्तेमाल बेहद जरुरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय मास्क का इस्तेमाल जरूरी है और घरों के अंदर रहने की कोशिश करनी चाहिए. जितना संभव हो बाहर निकलने से बचें क्योंकि मौजूदा हवा खासतौर पर बच्चों बुजुर्गों और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए बेहद खतरनाक है.
केंद्र और राज्य सरकार दोनों की विफलता
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता प्रदूषण केवल मौसम या पराली जलाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह नीतिगत विफलता का नतीजा भी है. केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी और समय रहते ठोस कदम न उठाने से हालात हर साल बदतर होते जा रहे हैं. जब तक दीर्घकालिक समाधान और सख्त अमल नहीं होगा तब तक राजधानी के लोग इसी जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर रहेंगे.