Jharkhand Crime News: अमन साहू गिरोह के रणनीतिकार मयंक सिंह पर ATS की चार्जशीट पूरक आरोप पत्र संख्या 10/2025 दाखिल कर दी गई है. अजरबैजान से प्रत्यर्पण के बाद पहली बार एटीएस ने न्यायालय में इस पूरक चार्जशीट को पेश किया है. एटीएस की रिपोर्ट और दायर दस्तावेजों में मयंक सिंह की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और कानून को चुनौती देने की हठधर्मिता का सनसनीखेज खुलासा हुआ है.
जांच में इंस्टाग्राम डेटा और तकनीकी सबूत मिले हैं जो दिखाते हैं कि मयंक सिंह विदेशों से गिरोह चला रहा था और नेटवर्क को निर्देश दे रहा था. उसके इंस्टाग्राम अकाउंट का नाम एसके मीणा घरसाणा 007 रिकॉर्ड में आया है और उसके पोस्ट से यह भी पता चला कि पतरातू में एटीएस टीम पर हुई फायरिंग की घटना के बाद उसने उस खबर को शेयर कर इस हमले की जिम्मेदारी लेकर अपने गिरोह का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की थी. चार्जशीट में उद्धृत पोस्ट में मयंक ने एटीएस के डीएसपी और दारोगा पर गोली लगने की खबर की क्लिपिंग साझा करते हुए संदेश दिया था कि उनका गिरोह पुलिस से भी ऊंचे कद का हो गया है.
एटीएस ने तकनीकी और पासपोर्ट रिकॉर्ड का मिलान कर यह साबित किया है कि मयंक सिंह मलेशिया, थाईलैंड और अजरबैजान में रहकर गैंग ऑपरेशन मॉनिटर कर रहा था. चार्जशीट के अनुसार वह 9 अगस्त 2019 को मलेशिया गया था और वहां शाह आलम में अस्थायी वीजा पर वेयर हाउस वर्कर के रूप में ठहरा था. फिर 20 नवंबर 2023 को वह थाईलैंड के फुकेट पहुंचा और 24 सितंबर 2024 को थाईलैंड से अजरबैजान गया जहां रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया. इंस्टाग्राम के आईपी एड्रेस और यात्रा लॉग ने इन जगहों से उसके कनेक्शन की पुष्टि की है.
अनुसंधान में यह भी सामने आया कि जुलाई 2023 में अमन साहू और मयंक सिंह के बीच हुई बातचीत में रंगदारी वसूलने और इलाके में दहशत फैलाने के निर्देश पर चर्चा हुई थी. इसी के तहत पतरातू में बैठक रखी गई और यदि पुलिस बैठक में हस्तक्षेप करती तो फायरिंग का आदेश था. चार्जशीट में कहा गया है कि इसी योजना के अमल में आने पर अपराधियों ने एटीएस टीम पर फायरिंग की जिसमें पुलिसकर्मी घायल हुए. गिरफ्तार अन्य आरोपियों बॉबी साव और दिगंबर प्रजापति के स्वीकारोक्ति बयानों में भी मयंक की संलिप्तता साफ झलकती है.
एटीएस ने मयंक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 307 और 120बी के साथ आर्म्स एक्ट और विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 16, 17 और 20 के तहत भी मामला संकलित किया है. झारखंड सरकार के विधि विभाग ने यूएपीए के तहत उसके खिलाफ अभियोजन की अनुमति दे दी है.
पूरी फाइल और तकनीकी सबूत यह संकेत देती है कि स्थानीय गैंगस्टर अब अंतरराष्ट्रीय ठिकानों का सहारा लेकर अपने नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं. मयंक सिंह के सोशल मीडिया पोस्ट ने दिखाया है कि अपराधी सिर्फ हिंसा तक सीमित नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक प्रभाव के जरिये अपने प्रभुत्व का प्रदर्शन भी कर रहे हैं. एटीएस की यह पूरक चार्जशीट न केवल स्थानीय घटनाओं की तह तक जा रही है बल्कि ग्लोबल लिंक को उजागर कर सुरक्षा चुनौतियों की गंभीरता को रेखांकित कर रही है. आगे की सुनवाई और सबूतों की पड़ताल यह तय करेगी कि इन लिंकों के आधार पर और क्या खुलासे होते हैं.