Jamshedpur: हर वर्ष 4 दिसंबर को भारत में नौसेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1971 में हुए भारत–पाकिस्तान युद्ध में भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है। इसी दिन ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत भारतीय नौसेना ने रात के अंधेरे में कराची बंदरगाह पर हमला कर पाक नौसेना को भारी क्षति पहुंचाई थी। जमशेदपुर के कई पूर्व नौसैनिक आज भी इस गौरवशाली इतिहास को गर्व के साथ याद करते हैं।
पहली पंक्ति के योद्धा – नवेंदु गांगुली
बिरसानगर निवासी नवेंदु गांगुली जिन्होंने गुलमोहर स्कूल से अपनी पढ़ाई की थी। सितम्बर 1989 में भारतीय नौसेना में भर्ती हुए थे। उनकी पहली पोस्टिंग मुंबई स्थित आईएनएस राणा पर हुई थी। एक ऐसा युद्धपोत जो समुद्र, धरती और हवा से मिसाइल दागने की क्षमता रखता है और हमेशा फर्स्ट लाइन ऑफ अटैक में तैनात रहता है।
नवेंदु नौचालन और दिशा-निर्देशन विभाग से जुड़े रहे, जहां रडार कंट्रोल और ऑपरेशनल सिस्टम की मदद से दूर स्थित वस्तुओं का पता लगाया जाता है।
ऑपरेशन ताशा का अनुभव
वह ऑपरेशन ताशा का हिस्सा भी बने। इस दौरान वे तमिलनाडु के धनुषकोडी (रामेश्वरम) समुद्री क्षेत्र में श्रीलंका की ओर से होने वाली गतिविधियों पर नज़र रखते थे, जहां एलटीटीई की घुसपैठ की आशंका रहती थी।
पानी की कम गहराई के कारण बड़े जहाज़ नहीं चल सकते थे, इसलिए वह तीन अन्य नाविकों के साथ नाव में ही गश्त करते थे। कई संदिग्ध नावें, तस्कर और संदिग्ध लोग इसी दौरान पकड़े गए।
बाद में वह आईएनएस कुकरि पर भी तैनात रहे और ऑपरेशन विजय के दौरान गुजरात तट के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई।
पाकिस्तान से जंग का हौसला आज भी कायम – योगेश्वर नंद सिंह
राधिका नगर, खरंगाझार निवासी योगेश्वर नंद सिंह वर्ष 2002 में भारतीय नौसेना में पेटी ऑफिसर (मैकेनिकल इंजीनियर) के रूप में शामिल हुए। चिल्का तथा आईएनएस शिवाजी, पुणे में प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली पोस्टिंग मुंबई के मझगांव शिपयार्ड में हुई।
थल सेना में जाने का सपना होने के बावजूद नौसेना में रहते हुए उन्होंने मरीन कमांडो (स्पेशल फोर्सेस) की ट्रेनिंग की कोशिश की। चयन न होने पर उन्होंने मरीन नेवल डाइवर का प्रशिक्षण पूरा किया और फिर मुंबई में तैनात किए गए। सेवा के दौरान उन्हें देश–विदेश में काम करने का व्यापक अनुभव मिला।
वे बताते हैं कि कैसे भारत के विध्वंसक पोत आईएनएस राजपूत ने पाकिस्तानी पनडुब्बी गाजी की गतिविधि भांपकर उसे समुद्र में नष्ट कर दिया, जिससे पाक नौसेना की रीढ़ लगभग टूट गई। इसके बाद भारतीय नौसेना ने रणनीति बदलते हुए एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत को चटगांव की ओर भेजा।
वायरलेस ऑपरेटर – सुखविंदर सिंह की कहानी
टेल्को के खड़गाझाड़ निवासी सुखविंदर सिंह ने मैट्रिक के बाद 1977 में नौसेना में नौकरी जॉइन की। उनकी पहली शिप आईएनएस ब्रह्मपुत्र (मुंबई) थी। ज्वाइनिंग के दिन ही जहाज़ मॉरिशस के लिए रवाना हो गया, जहां छह दिन के रुकाव के दौरान उन्हें वहां की संस्कृति और लोगों को करीब से जानने का मौका मिला।
बाद में उनकी पोस्टिंग आईएनएस नेताजी सुभाष (कोलकाता) में हुई, जहां वह जहाज़ से वायरलेस द्वारा संचार व्यवस्था संभालते थे। अभ्यास के दौरान डमी टारगेट पर फायरिंग और युद्धकालीन संदेशों को भेजने–प्राप्त करने की जिम्मेदारी भी उनके पास थी।