Uttarakhand: विश्व दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर समाज कल्याण विभाग द्वारा हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय दक्षता सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिव्यांगजन प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र और मानपत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने सभी दिव्यांगजन साथियों को दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन केवल किसी औपचारिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है, बल्कि उन विलक्षण व्यक्तियों के योगदान को सराहने का अवसर है जिन्होंने अपनी परिस्थितियों को प्रेरणा में बदलकर समाज को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि “दिव्यांगता शरीर तक सीमित होती है, सपनों तक नहीं”, और आज हमारे दिव्यांग भाई-बहन हर क्षेत्र में देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कई प्रेरणादायक उदाहरण भी साझा किए. भारत के प्रथम पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर, इंग्लिश चैनल पार करने वाले सत्येंद्र सिंह लोहिया तथा बिना हाथों के विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियन बनने वाली शीतल देवी। उन्होंने हाल ही में कोलंबो में आयोजित टी-20 ब्लाइंड वूमेन वर्ल्ड कप–2025 को जीतने वाली भारत की दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम पर भी गर्व जताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही दिव्यांगजनों को समान अधिकारों और गरिमामय जीवन के साथ आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नए भवनों, परिवहन केन्द्रों व अस्पतालों के निर्माण में दिव्यांगजन-अनुकूल व्यवस्थाएँ अनिवार्य कर दी गई हैं, और पुराने भवनों में भी सुगम्यता बढ़ाने हेतु आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं। इसके साथ ही “कॉमन साइन लैंग्वेज” के प्रसार तथा दिव्यांगजन हितैषी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री द्वारा उल्लेखित प्रमुख योजनाएं
आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांग व्यक्तियों को ₹1500 मासिक पेंशन
दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को ₹700 मासिक भरण-पोषण भत्ता
कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने हेतु ₹7000 अनुदान
दिव्यांगजन से विवाह करने पर ₹50,000 प्रोत्साहन राशि
दिव्यांग छात्रों के लिए सिविल सेवा की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग
जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से सभी योजनाओं का एकीकृत लाभ
इसके साथ ही देहरादून स्थित आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय में ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा शुरू की गई है। ऊधमसिंह नगर में मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए पुनर्वास गृह का निर्माण किया गया है तथा देहरादून में राज्य का पहला “प्रधानमंत्री दिव्यांशा केंद्र” भी प्रारंभ हो चुका है। राज्य निर्माण के बाद पहली बार व्यापक दिव्यांग सर्वेक्षण भी जारी है, जिससे वास्तविक आंकड़ों और आवश्यकताओं का सही पता लगाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने राज्य के युवा नवोन्मेषकों से आह्वान किया कि वे अपने आविष्कारों में दिव्यांगजनों की जरूरतों को प्राथमिकता दें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऐसी तकनीक विकसित करें, जो उनके जीवन को और सरल और सुलभ बना सके। उन्होंने अधिकारियों को भी ऐसे युवाओं को हर संभव सहयोग देने के निर्देश दिए।
41 दिव्यांगजनों का सम्मान
समारोह में 41 उत्कृष्ट दिव्यांग प्रतिभागियों को ₹8000 की पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र और मानपत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका उत्साह बढ़ाया।
शिलान्यास एवं उद्घाटन
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने to देहरादून में ₹905.13 लाख की लागत से बनने वाले आयुक्त दिव्यांगजन उत्तराखंड, उत्तराखंड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड तथा समाज कल्याण आईटी सेल के बहुउद्देशीय कार्यालय भवन का शिलान्यास प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र नैनीताल (एलिम्को) का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोग
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, मेयर गजराज बिष्ट, विधायक बंशीधर भगत, सरिता आर्या, राम सिंह कैड़ा, भाजपा प्रदेश महामंत्री तरुण बंसल, जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, दर्जा राज्यमंत्री सुरेश भट्ट, समाज कल्याण सचिव श्रीधर बाबू अदांगी, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सम्मानित नागरिक और बड़ी संख्या में दिव्यांगजन उपस्थित रहे।