Jharkhand : झारखंड की सियासत में इन दिनों भूचाल सा मचा हुआ है. एक तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर ED का शिकंजा कसता जा रहा है, दूसरी तरफ दिल्ली में उनकी और कल्पना सोरेन की भाजपा के शीर्ष नेता से गुप्त मुलाकात के कयास गर्म हैं. क्या झारखंड में खेला होने वाला है?
सबसे पहले ED का मामला, रांची के बड़गाईं लैंड स्कैम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने हेमंत सोरेन को 10 बार समन भेजा. अवहेलना के आरोप में MP-MLA कोर्ट में मुकदमा चल रहा है. हाईकोर्ट ने पहले पेशी से छूट दी थी, लेकिन 25 नवंबर 2025 को राहत वापस ले ली. अब 12 दिसंबर को हेमंत सोरेन को व्यक्तिगत रूप से पेश होना है. अगर नहीं गए तो गिरफ्तारी या बेंच वारंट तय है. JMM इसे भाजपा की साजिश बता रही है, लेकिन दबाव लगातार बढ़ रहा है.
दूसरा बड़ा झटका भाजपा को घाटशिला उपचुनाव में लगा. 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा यहां 22,446 वोटों से हारी थी. इस बार 11 नवंबर 2025 को हुए उपचुनाव में हार का अंतर बढ़कर 38,524 वोट हो गया. JMM ने 1 लाख 4 हजार से ज्यादा वोट लिए, भाजपा सिर्फ 66 हजार पर सिमट गई. आदिवासी बेल्ट में भाजपा की पकड़ और कमजोर पड़ी है.
वहीं अब बीते 2 दिनों से दिल्ली में हेमंत सोरेन दंपति की भाजपा के टॉप लीडर से अनौपचारिक मुलाकात हुई. सूत्र बता रहे हैं कि सिर्फ औपचारिक बात नहीं, बल्कि साथ आने की प्रारंभिक सहमति बन गई है. डिप्टी CM पद पर भी चर्चा हुई है. अगर ऐसा हुआ तो नंबर गेम देखिए: JMM के 34 + भाजपा के 21 + अन्य 3 = कुल 58 विधायक, बहुमत से कहीं ज्यादा.
दूसरी तरफ हेमंत सरकार पर वित्तीय संकट भी भारी है. मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना
में महिलाओं को 2500 रुपये महीना और धान का MSP 3200 रुपये करने का वादा अधर में लटका है. केंद्र से पैसा नहीं मिल रहा. ऐसे में केंद्र के साथ जाने का रास्ता आसान लग रहा है.
सवाल ये है कि क्या हेमंत सोरेन वही करेंगे जो 2024 चुनाव में भाजपा पर ED के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जनता से वादा किया था? या सत्ता और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा U-टर्न लेंगे?
12 दिसंबर की तारीख और आने वाले कुछ दिन झारखंड की सियासत की दिशा तय करेंगे. फिलहाल चुप्पी है, लेकिन चुप्पी से पहले तूफान की आहट साफ सुनाई दे रही है.