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  • 2025-12-01

National News: भारत का मैन्युफैक्चरिंग PMI नवंबर में 56.6 पर पहुंचा, ग्रोथ की धीमी रफ्तार- HSBC रिपोर्ट

National News: भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने नवंबर में भी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया, हालांकि ग्रोथ की रफ्तार में हल्की सुस्ती देखी गई. HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स नवंबर में 56.6 दर्ज किया गया, जो न्यूट्रल मार्क 50.0 से काफी ऊपर है. एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी डेटा के अनुसार यह स्तर लॉन्ग रन एवरेज 54.2 से भी बेहतर है.

रिपोर्ट बताती है कि अक्टूबर में PMI 59.2 था और नवंबर के आंकड़े फरवरी के बाद से ऑपरेटिंग कंडीशन में सबसे धीमे सुधार को दर्शाते हैं. नए एक्सपोर्ट ऑर्डर की रफ्तार एक वर्ष में सबसे कम रही. सेल्स में सीमित बढ़ोतरी का असर खरीदारी की मात्रा और नई नौकरियों पर पड़ा और आउटपुट की संभावनाओं को लेकर सेंटिमेंट 2022 के मध्य के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. नवंबर में इनपुट लागत और सेलिंग प्राइस दोनों की बढ़ोतरी धीमी हुई, जिसमें इनपुट लागत ने नौ महीनों और सेलिंग चार्ज ने आठ महीनों का न्यूनतम स्तर छुआ.

HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ ने मैन्युफैक्चरिंग विस्तार की गति को प्रभावित किया है. नए एक्सपोर्ट ऑर्डर 13 महीनों के निचले स्तर पर पहुंचे और भविष्य के आउटपुट को लेकर बिजनेस कॉन्फिडेंस में गिरावट दर्ज की गई, जो टैरिफ के प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं की ओर इशारा करती है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को ऑर्डर बुक वॉल्यूम में बढ़ोतरी का फायदा मिला. प्रतिस्पर्धी कीमतें, मांग का सकारात्मक रुझान और क्लाइंट्स की बढ़ती दिलचस्पी इसके प्रमुख कारण रहे. इसके बावजूद चुनौतीपूर्ण मार्केट कंडीशन, प्रोजेक्ट में देरी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते ओवरऑल ग्रोथ नौ महीनों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई. इंटरनेशनल मार्केट में सेल्स बेहतर बनी रही और अफ्रीका, एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट में मजबूत मांग देखने को मिली.

नवंबर के PMI आंकड़े बताते हैं कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी विस्तार की रफ्तार बनाए हुए है, लेकिन बाहरी दबाव और वैश्विक व्यापार स्थितियों की अनिश्चितता इसकी गति को सीमित कर रही है. अमेरिकी टैरिफ का असर साफ दिख रहा है और एक्सपोर्ट बेस्ड ग्रोथ पर इसका दबाव पड़ रहा है. घरेलू मांग स्थिर है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियां और प्रोजेक्ट देरी जैसे आंतरिक कारक आने वाले महीनों में प्रदर्शन को चुनौती दे सकते हैं. सेक्टर को स्थिरता बनाए रखने के लिए लागत प्रबंधन, सप्लाई चेन की मजबूती और इंटरनेशनल मार्केट के विविधीकरण पर और ध्यान देने की जरूरत है.
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