National News: दिसंबर की शुरुआत के साथ ही आम लोगों के लिए राहत भरी खबर आ सकती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई के दबाव में कमी आने के चलते रिजर्व बैंक अगले हफ्ते रेपो रेट में कटौती कर सकता है. अनुमान है कि आरबीआई पॉलिसी रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की कमी की घोषणा कर सकता है. यदि ऐसा होता है तो होम लोन और ऑटो लोन की EMI पर सीधा असर पड़ेगा और ग्राहकों का मासिक बोझ कम हो जाएगा.
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक तीन दिसंबर से शुरू होगी. पांच दिसंबर को पॉलिसी फैसलों का ऐलान किया जाएगा. रिजर्व बैंक गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह दस बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये फैसला सार्वजनिक करेंगे. वर्तमान समय में रेपो रेट 5.5 प्रतिशत है. पिछले वर्ष फरवरी से अगस्त के बीच सेंट्रल बैंक रेपो रेट में कुल 100 बेसिस पॉइंट की कटौती कर चुका है. यदि इस बार भी 25 बेसिस पॉइंट की कमी की घोषणा होती है तो रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत रह जाएगा.
महंगाई के मोर्चे पर हाल के महीनों में सुधार दिखा है. खुदरा महंगाई दर पिछले दो महीनों से सरकार द्वारा निर्धारित दो प्रतिशत के निचले स्तर से नीचे चल रही है. खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी इसका प्रमुख कारण रही है. क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी के अनुसार सोने को छोड़कर कोर महंगाई अक्टूबर में 2.6 प्रतिशत रही जिस पर जीएसटी दर में कमी का असर पड़ा. इसी वजह से दिसंबर में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की संभावना बताई जा रही है.
हालांकि आर्थिक मोर्चे पर मिले मजबूत संकेतों को देखते हुए कुछ विशेषज्ञ रेपो रेट में बदलाव को लेकर संशय भी जता रहे हैं. दूसरी तिमाही में देश की विकास दर 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई है. वित्तीय अनुशासन, लक्षित सार्वजनिक निवेश और जीएसटी दर में कटौती जैसे कदमों ने विकास गति को और सहारा दिया है. एसबीआई की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि मजबूत ग्रोथ के चलते रिजर्व बैंक अपने रुख में स्थिरता बरत सकता है. वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि पॉलिसी रेट में बदलाव की संभावना बेहद सीमित दिख रही है.
फिलहाल आर्थिक परिदृश्य दो विपरीत संकेतों के बीच खड़ा है. एक ओर महंगाई का दबाव कम है जो रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश देता है. दूसरी ओर अर्थव्यवस्था की तेज वृद्धि दर सेंट्रल बैंक को सतर्क रहने का संकेत देती है. यदि रेपो रेट घटता है तो कर्ज लेने वालों को तत्काल राहत मिलेगी और लोन सस्ता होगा. लेकिन यदि विकास दर को देखते हुए आरबीआई स्थिति को यथावत रखता है तो मौद्रिक स्थिरता को प्राथमिकता देने का संदेश जाएगा. लिहाजा फैसला नजदीकी भी हो सकता है और संतुलन साधने वाला भी.