Jharkhand Political News: झारखंड में दिशाहिन चल रही भाजपा ने शनिवार को हेमंत सरकार को लेकर आरोप पत्र जारी किया है. यह पत्र राज्य सरकार के गठन के एक साल पर जारी की जाती लेकिन भाजपा इसमें एक दिन लेट है. अब ऐसे में क्या किया जा सकता है भाजपा नेता इन दिनों व्यस्त चल रहे होंगे तभी तो वे अपना काम तक भुल जा रहे हैं. राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा है कि प्रदेश भाजपा अपने निर्धारित कार्यक्रम से पीछे रह गई है और इसी देरी पर अब सवाल उठ रहे हैं.
प्रदेश भाजपा हर वर्ष सरकार के वर्षगांठ पर आरोप पत्र जारी करती रही है, लेकिन पिछले छह वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि यह दस्तावेज सरकार के वर्षगांठ के एक दिन बाद सामने आया है. शनिवार को प्रदेश कार्यालय में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, कार्यकारी अध्यक्ष सांसद आदित्य साहू, प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, मुख्य सचेतक विधायक नवीन जायसवाल, प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और आरोप पत्र समिति के सदस्य रविनाथ किशोर की मौजूदगी में यह आरोप पत्र जारी किया गया.
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हेमंत सरकार के छह वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन राज्य की जनता को इसका लाभ नहीं मिला है. उनके अनुसार सरकार अपने वादों को पूरा करने में असफल रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने हर स्तर पर निराश किया है.
भाजपा के आरोप पत्र में कहा गया है कि राज्य में लूट और भ्रष्टाचार का वातावरण बन गया है. बालू, पत्थर, जमीन और कोयले की अवैध निकासी पर रोक नहीं लगाई जा सकी है. भाजपा का दावा है कि आम आदमी के लिए बालू हीरा से महंगा हो गया है. कोयले का अवैध उत्खनन राज्य सरकार के संरक्षण में होने का आरोप लगाया गया है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि आदिवासी समाज के अधिकारों का हनन हो रहा है और उनकी परंपराओं पर आघात किया जा रहा है.
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार घुसपैठियों को संरक्षण दे रही है और राज्य की डेमोग्राफी बदलने का प्रयास किया जा रहा है. भाजपा नेताओं ने कहा कि अवैध डीजीपी की नियुक्ति और उसके बाद के घटनाक्रम ने सरकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है.
भाजपा नेताओं ने कहा कि वे सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष कर रहे हैं. पार्टी ने कहा कि जनता के सहयोग से हेमंत सरकार की नाकामियों को उजागर किया जाएगा.
मुख्य आरोप
- मइयां सम्मान योजना में सभी महिलाओं को लाभ देने की घोषणा पूरी न करना
- नगर निगम चुनाव में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत तक सीमित रखना जबकि वादा 27 प्रतिशत का था
- एससी आयोग और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रालय का गठन अब तक न होना
- 10 महीने से 67 लाख गरीबों को दाल, चीनी और नमक उपलब्ध न करा पाना
- 10 लाख युवाओं को नौकरी देने के वादे पर अमल न करना
- पेपर लीक और नियुक्ति में कदाचार के आरोप
- नियोजन नीति के अभाव में स्थानीय युवाओं को लाभ न मिलना
- परीक्षाओं के नोटिफिकेशन रद्द करना और शुल्क लेने की प्रक्रिया पर सवाल
- जेएसएसी सीजीएल पेपर लीक मामला
- हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज का वादा अधूरा रहना
- सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के कमजोर परिणाम
- धान खरीद में अव्यवस्था और बिचौलियों की भूमिका
- शराब घोटाला और राजस्व की हानि
- शिक्षा विभाग में आधार स्कैम का मामला
- झारखंडी कंपनियों को टेंडर से बाहर रखना
- स्वास्थ्य विभाग में कई टेंडर घोटाले
- सिविल सर्जन कार्यालय में 50 करोड़ का घोटाला
- भवन निर्माण विभाग के टेंडर में अनियमितता
- सरकारी विभागों में रिक्त पदों की संख्या को लेकर अनियमितता
- आपदा मोचन निधि से खर्च 1300 करोड़ का लेखा जोखा स्पष्ट नहीं
- धार्मिक पक्षपात और फर्जी प्रमाण पत्र प्रकरण
- अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री पर फर्जी पीएचडी का आरोप
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार पर लगाए गए आरोपों में कई बिंदु प्रभावित दिखते हैं, जबकि कुछ मुद्दे प्रशासनिक ढांचे की वास्तविक चुनौतियों की ओर संकेत करते हैं. वर्षगांठ के एक दिन बाद आरोप पत्र जारी होना भाजपा के अंदर समन्वय की कमी के संकेत भी देता है. हालांकि इस आरोप पत्र के बाद राज्य की राजनीति में तीखी बयानबाजी और टकराव बढ़ने की संभावना है.