Jharkhand News: झारखंड सरकार ने निजी सुरक्षा अभिकरणों के प्रशिक्षण ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए नई अधिसूचना जारी की है. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब सुरक्षा प्रशिक्षण की अवधि बढ़ा दी गई है, पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया गया है और पूरी प्रक्रिया पर सख्त मॉनिटरिंग लागू होगी. सरकार का कहना है कि निजी सुरक्षा क्षेत्र को अब अधिक पेशेवर और तकनीकी रूप से सक्षम सेवाएं देनी होंगी.
संशोधित नियम निजी सुरक्षा अभिकरण नियमावली 2023 और निजी सुरक्षा अभिकरण अधिनियम 2005 के तहत लागू किए गए हैं. इसके बाद सुरक्षा गार्ड, पर्यवेक्षक और लाइसेंसधारी सभी नए प्रावधानों के दायरे में आएंगे. नियुक्ति से पहले पूर्ण प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है. प्रशिक्षण में फील्ड ड्रिल, व्यावहारिक अभ्यास और तकनीकी उपकरणों के उपयोग पर विशेष जोर रहेगा. सभी अभिकरणों को प्रशिक्षण से जुड़ी पूरी जानकारी सरकार को उपलब्ध करानी होगी. बिना मान्यता प्राप्त संस्थान प्रशिक्षण नहीं दे सकेंगे.
सरकार ने प्रशिक्षण अवधि में भी बड़ा बदलाव किया है. लाइसेंसधारी को 6 कार्य दिवस का प्रशिक्षण मिलेगा. प्रवेश स्तर के गार्ड और पर्यवेक्षक को 20 दिनों में 100 घंटे की कक्षा और 60 घंटे की फील्ड ट्रेनिंग लेनी होगी. भूतपूर्व सैनिकों और पूर्व पुलिसकर्मियों के लिए 7 दिन का प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है. नक्सल प्रभावित जिलों में तैनाती के लिए दो से तीन माह तक की विशेष ट्रेनिंग अनिवार्य रहेगी. सरकारी मानना है कि बढ़ी हुई अवधि से संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा क्षमता और प्रभावी बनेगी.
नया पाठ्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क एनएसक्यूएफ के अनुरूप तैयार किया गया है. सुरक्षा गार्डों के लिए सीसीटीवी मॉनिटरिंग, तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल, भीड़ प्रबंधन और आपात प्रतिक्रिया अभ्यास शामिल किए गए हैं. पर्यवेक्षकों के लिए नेतृत्व क्षमता, जोखिम मूल्यांकन और संचालन प्रबंधन को पाठ्यक्रम में रखा गया है. लाइसेंसधारी वर्ग के लिए कानूनी प्रावधान और नियामकीय अनुपालन से जुड़े विषय शामिल किए गए हैं.
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उम्मीदवारों को फॉर्म 8 में प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा. यह प्रमाणपत्र देशभर में मान्य होगा और इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
सरकार के इस कदम का उद्देश्य निजी सुरक्षा क्षेत्र को अधिक सक्षम और मानकीकृत बनाना है. राज्य भर में बढ़ते निजी सुरक्षा कारोबार और उससे जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए प्रशिक्षण में कड़ाई और तकनीकी सुधार आवश्यक थे. नए प्रावधानों से सुरक्षा अभिकरणों की जवाबदेही बढ़ेगी और प्रशिक्षित कर्मियों की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी.